सऊदी अरब और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने हाल ही में एक अहम मुलाकात की है। इस बैठक में क्षेत्र की स्थिरता और अमेरिका तथा ईरान के बीच हुए नए समझौते पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता इलाके में शांति लाने के लिए एक बड़ा कदम है।
21 जून 2026 को मिस्र की राजधानी काहिरा में R4 ग्रुप की चौथी बैठक हुई। इसमें सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद और पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक डार शामिल हुए। इस मीटिंग में तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्री भी मौजूद थे, जहाँ सभी ने क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर अपने विचार साझा किए।
अमेरिका और ईरान के बीच ‘इस्लामाबाद समझौता’
बैठक के दौरान सभी मंत्रियों ने 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) का स्वागत किया। इस समझौते का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच दुश्मनी को खत्म करना और आने वाले 60 दिनों में एक व्यापक डील करना है।
- सैन्य कार्रवाई बंद: दोनों देशों ने तुरंत सैन्य अभियान रोकने पर सहमति जताई है।
- व्यापारिक रास्ता: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से व्यापारिक जहाजों के आने-जाने का रास्ता फिर से शुरू होगा।
- तेल निर्यात: ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में तत्काल राहत दी जाएगी।
- पुनर्निर्माण फंड: ईरान के विकास के लिए 300 अरब डॉलर की एक योजना बनाने का प्रस्ताव है।
इस ऐतिहासिक समझौते को करवाने में पाकिस्तान की भूमिका बहुत अहम रही। R4 देशों और सऊदी अरब ने इस काम के लिए पाकिस्तान और कतर की कोशिशों की जमकर तारीफ की। समझौते को लागू करने के लिए 21 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेंस्टॉक में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधि शामिल थे।
हालाँकि यह समझौता एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन अभी भी कई मुद्दे बाकी हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर बातचीत अभी जारी रहेगी। 25 जून 2026 को मनामा में हुई अमेरिका और GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) की बैठक में भी इस समझौते का समर्थन किया गया, लेकिन ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने के खतरे को रोकने पर जोर दिया गया।
