ईरान में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने हाथ मिलाया है. इन चारों देशों ने एक साझा बयान जारी कर साफ कहा है कि शांति की किसी भी कोशिश में अरब और खाड़ी देशों की सुरक्षा और स्थिरता का सबसे पहले ध्यान रखा जाना चाहिए. इन देशों का मानना है कि बिना क्षेत्रीय सुरक्षा के कोई भी कूटनीतिक समाधान सफल नहीं होगा.

काहिरा में बड़ी बैठक और चर्चा

क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्रियों की एक बैठक 21 जून 2026 को काहिरा में होनी तय हुई है. इस बैठक का मुख्य मकसद ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत के बीच अपनी स्थिति को मजबूत करना है, क्योंकि स्विट्जरलैंड में होने वाली एक योजनाबद्ध बैठक को स्थगित कर दिया गया था.

इससे पहले 20 जून 2026 को काहिरा में ही मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और अमेरिका के अधिकारियों ने बातचीत की थी. इस चर्चा में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (MoU) के आधार पर तनाव कम करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया.

लगातार हो रही हैं बैठकें

इन चारों देशों के बीच तालमेल बिठाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कई महत्वपूर्ण मुलाकातें हुई हैं:

  • 19 मार्च 2026 को रियाद में विदेश मंत्रियों की बैठक हुई.
  • 29 मार्च 2026 को इस्लामाबाद में चर्चा हुई.
  • 18 अप्रैल 2026 को अंताल्या में बैठक का आयोजन किया गया.

हमलों की निंदा और सुरक्षा की मांग

19 मार्च 2026 को रियाद में हुई बैठक के बाद जारी बयान में ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई. इसमें ईरान द्वारा नागरिक इलाकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किए गए हमलों को गलत बताया गया और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने को कहा गया.

तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने कहा कि क्षेत्रीय समस्याओं को सुलझाने के लिए उन्हीं देशों की भागीदारी जरूरी है जो वहां मौजूद हैं. वहीं, इस पूरे प्रयास में पाकिस्तान मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है ताकि युद्ध को जल्द से जल्द खत्म किया जा सके और आर्थिक व सुरक्षा हितों की रक्षा हो सके.