US और Iran के बीच चल रही बातचीत को लेकर सऊदी अरब और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर चर्चा की। 2 जुलाई 2026 को हुई इस बातचीत में दोनों देशों ने दोहा में हुई मीटिंग की प्रगति की समीक्षा की। इस बातचीत का मुख्य मकसद इलाके में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।
दोहा में हुई तकनीकी बातचीत
दोहा में 1 और 2 जुलाई 2026 को US और Iran के बीच तकनीकी बातचीत हुई। इस मीटिंग में Qatar और Pakistan ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इस वार्ता का मुख्य लक्ष्य Islamabad Memorandum of Understanding (MoU) को लागू करना था।
Qatar के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Dr. Majed Al Ansari और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है।
- मुख्य मुद्दे: चर्चा के दौरान Strait of Hormuz और ईरान की जमी हुई संपत्ति (frozen assets) को आंशिक रूप से छोड़ने पर बात हुई।
- असहमति: जमी हुई संपत्ति को वापस करने के तरीके पर कुछ असहमति देखी गई।
- भविष्य की योजना: परमाणु मुद्दों पर आने वाली मीटिंग्स में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल और आगामी कदम
US की तरफ से Steve Witkoff और Jared Kushner इस बातचीत में शामिल थे। वहीं ईरान की टीम का नेतृत्व Deputy Foreign Minister Kazem Gharibabadi और मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने किया।
दोनों पक्ष गुरुवार तक एक कम्युनिकेशन चैनल बनाने पर सहमत हुए ताकि MoU के किसी भी उल्लंघन की रिपोर्ट और रिकॉर्ड रखा जा सके। अगली बातचीत ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के अंतिम संस्कार (4 से 9 जुलाई 2026) के बाद होगी।
सऊदी और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
Saudi Foreign Minister Prince Faisal bin Farhan Al Saud और पाकिस्तान के Deputy Prime Minister और Foreign Minister Ishaq Dar ने फोन पर इस स्थिति की समीक्षा की। दोनों मंत्रियों ने बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष जताया और उम्मीद की कि इससे क्षेत्र में शांति आएगी।
Prince Faisal ने Islamabad MoU को लागू करने में पाकिस्तान की रचनात्मक राजनयिक भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
