सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) अब दुनिया भर में और ज़्यादा निवेश करेगा. रोम में हुए FII प्रायोरिटी समिट के दौरान फंड के गवर्नर यासिर अल-रुमैयान ने साफ़ किया कि सऊदी अरब अपने 2030 के नए प्लान के तहत अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा देगा. उन्होंने कहा कि यूरोप में नियमों की कुछ दिक्कतें ज़रूर हैं, लेकिन वहां काम करने के मौके ज़्यादा हैं.

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गवर्नर अल-रुमैयान ने बताया कि PIF पिछले कई सालों से यूरोप में भारी निवेश कर रहा है और वहां की कंपनियों के साथ अपनी पार्टनरशिप को और मज़बूत बनाना चाहता है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब केवल कुछ महीनों का नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों और दशकों की प्लानिंग करता है. उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे सालों पहले बनाई गई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने हाल के समय में Strait of Hormuz में हुए तनाव के दौरान सऊदी अरब के एक्सपोर्ट को बचाया.

उन्होंने साफ़ किया कि क्षेत्रीय संघर्षों का असर सिर्फ तेल या गैस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पेट्रोकेमिकल्स, खाद और बड़ी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज पर भी पड़ता है. इसीलिए PIF एक धैर्यवान निवेशक की तरह काम कर रहा है ताकि उसका पोर्टफोलियो हर तरह के संकट को झेल सके.

यूरोप में निवेश और प्रभाव

सऊदी अरब ने यूरोप और ब्रिटेन में बड़ा पैसा लगाया है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है. साथ ही सऊदी अरामको ने भी यूरोपीय सप्लायर्स के साथ बड़े स्तर पर कारोबार किया है. निवेश से जुड़े मुख्य आंकड़े नीचे टेबल में दिए गए हैं:

विवरण आंकड़ा / राशि
यूरोप और UK में PIF का कुल निवेश (2017-2025) €98 बिलियन
यूरोप की GDP में योगदान €70 बिलियन
यूरोप में पैदा हुई नौकरियां 1,60,000
यूरोपीय सप्लायर्स पर Saudi Aramco का खर्च €80 बिलियन
सिर्फ इटली में Aramco का खर्च €20 बिलियन
2030 तक अनुमानित जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट्स €10.4 बिलियन
कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए निवेश अवसर 140 प्रोजेक्ट्स

गवर्नर ने यह भी बताया कि सऊदी अरब की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री को बेहतर बनाने के लिए यूरोप के साथ सहयोग किया जा रहा है. इसके अलावा इटली की लग्जरी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में भी निवेश किया गया है.

नियमों को लेकर चेतावनी

सकारात्मक बातों के साथ-साथ अल-रुमैयान ने एक चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि यूरोप में कुछ नए नियम बनाए जा रहे हैं, जो बड़े निवेशकों को हतोत्साहित कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे नियम PIF, Aramco और SABIC जैसी बड़ी कंपनियों के लिए निवेश करना मुश्किल बना सकते हैं. हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि यूरोपीय रेगुलेटर्स इस दिशा में सही कदम उठाएंगे.