ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच सऊदी अरब के बंदरगाहों पर माल की आवाजाही पर असर पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 के दौरान सऊदी बंदरगाहों ने 14.3 मिलियन टन माल संभाला. क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों की नाकेबंदी की वजह से व्यापारिक गतिविधियों में कमी आई है.
बंदरगाहों के आंकड़ों में आई गिरावट
सऊदी पोर्ट्स अथॉरिटी (Mawani) के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में बंदरगाहों ने 14.5 मिलियन टन से ज़्यादा माल संभाला था. यह पिछले साल अप्रैल के 22.2 मिलियन टन के मुकाबले 34.58% कम है. वहीं मई 2024 में यह आंकड़ा 21.3 मिलियन टन था, जिससे पता चलता है कि मौजूदा हालात ने व्यापार को धीमा कर दिया है.
ईरान युद्ध और समुद्री रास्तों का संकट
यह पूरी स्थिति 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ईरान युद्ध के कारण हुई है. अमेरिका और इसराइल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. इस संघर्ष का असर समुद्री रास्तों पर पड़ा है:
- Strait of Hormuz: यह रास्ता 28 फरवरी 2026 से लगभग बंद है, जिससे जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है.
- शिपिंग कंपनियां: Maersk और CMA CGM जैसी बड़ी कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र में अपना काम बंद कर दिया है.
- रास्तों में बदलाव: कई जहाजों को अब Cape of Good Hope के रास्ते जाना पड़ रहा है, जिससे समय और किराया दोनों बढ़ गए हैं.
- नाकेबंदी: अमेरिका ने 13 अप्रैल से 29 मई 2026 तक ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की थी.
सऊदी सरकार का आधिकारिक बयान
सऊदी विदेश मंत्रालय ने 11 जून 2026 को ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर किए गए हमलों की निंदा की. मंत्रालय ने शांति की अपील करते हुए कहा कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए. इससे पहले 9 मार्च 2026 को भी सऊदी सरकार ने अपनी और अन्य GCC देशों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाने का अधिकार जताया था.
वाशिंगटन में सऊदी दूतावास के प्रवक्ता फहद नाजर ने मार्च 2026 में बताया था कि सऊदी अरब ईरान के साथ एक विश्वसनीय समझौते के लिए कूटनीतिक कोशिशों का समर्थन करता है.
