बहरीन में ईरान के ड्रोन हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। सऊदी अरब और कतर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि यह बहरीन की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। इस घटना के बाद समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ी चिंता जताई गई है।

खाड़ी देशों का कड़ा विरोध

कतर के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर ईरान के इस हमले की कड़ी निंदा की है। कतर ने इसे बहरीन की आजादी का उल्लंघन बताया और कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी बहुत जरूरी है। कतर ने बहरीन के साथ अपनी पूरी एकजुटता जाहिर की है।

सऊदी अरब ने भी इस हमले को गलत बताया है। सऊदी विदेश मंत्रालय का कहना है कि ईरान की ये हरकतें पूरे इलाके की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। सऊदी अरब ने बहरीन का पूरा समर्थन किया है और कहा कि बहरीन अपनी सुरक्षा के लिए जो भी कदम उठाएगा, सऊदी उसके साथ है। इनके अलावा UAE, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र ने भी इन ड्रोन हमलों की निंदा की है।

समुद्री रास्तों पर संकट

सिर्फ जमीन ही नहीं, समुद्र में भी हालात तनावपूर्ण हैं। 27 जून 2026 को Strait of Hormuz में एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात चीज से हमला हुआ, जिससे जहाज के ऊपरी हिस्से यानी ब्रिज को नुकसान पहुँचा। इस वजह से इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) को जहाजों को निकालने के अपने काम को रोकना पड़ा।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने GCC देशों के साथ मिलकर एक साझा बयान दिया है। उन्होंने मांग की है कि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बिना किसी शर्त और रोक-टोक के होनी चाहिए। उन्होंने इस रास्ते पर किसी भी तरह का टोल या कंट्रोल लगाने की कोशिश को खारिज कर दिया है।

ईरान का दावा और UN की अपील

दूसरी तरफ, ईरान की IRGC ने कहा है कि वह इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की निगरानी करने का हक रखती है। ईरान ने चेतावनी दी है कि जहाज उनके बताए रास्तों पर ही चलें। ईरान का यह भी दावा है कि उसने अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया क्योंकि अमेरिका ने उसके दक्षिणी तटों पर हवाई हमले किए थे।

इस पूरे विवाद के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के प्रस्ताव 2817 का जिक्र किया गया है। दुनिया भर से मांग की जा रही है कि पड़ोसी देशों के खिलाफ सभी तरह के हमलों और उकसावे वाली हरकतों को तुरंत बंद किया जाए।