सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी ने फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को लेकर चर्चा की और अमेरिका व ईरान के बीच हुए हालिया समझौते पर अपने विचार साझा किए।
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता
17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच चल रहे टकराव को खत्म करना और एक स्थायी शांति स्थापित करना है।
- दुश्मनी का अंत: अमेरिका और ईरान दोनों ने अपनी लड़ाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का वादा किया है, जिसमें लेबनान का मुद्दा भी शामिल है।
- संप्रभुता का सम्मान: दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे और संप्रभुता का सम्मान करेंगे।
- बातचीत की समय सीमा: अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।
- आर्थिक मदद: युद्ध के बाद ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का प्रावधान किया गया है।
- पाबंदियों में राहत: अमेरिका ने ईरान के कच्चे तेल के निर्यात और बैंकिंग लेनदेन पर लगी पाबंदियों को कम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
- समुद्री सुरक्षा: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए जहाजों की आवाजाही की आजादी सुनिश्चित करने का वादा किया है।
क्षेत्रीय प्रभाव और कूटनीतिक प्रयास
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान ने अल जजीरा टीवी को बताया कि यह समझौता युद्ध को खत्म करने और बातचीत शुरू करने की दिशा में एक मजबूत बुनियाद है। इस पूरी प्रक्रिया में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहे हैं।
वहीं, 25 जून 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से फोन पर बात की। इस दौरान अमेरिका के साथ चल रही बातचीत की प्रगति और क्षेत्र के मौजूदा हालातों पर चर्चा हुई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब अब ईरान और अरब खाड़ी देशों के बीच एक ‘मेल-मिलाप शिखर सम्मेलन’ (reconciliation summit) आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। यह सम्मेलन अमेरिका और ईरान की बातचीत से अलग होगा, ताकि क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी तालमेल और सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
