मदीना में एक बड़ा हादसा टल गया जहाँ सऊदी रेड क्रिसेंट अथॉरिटी की इमरजेंसी टीम ने एक इंडोनेशियाई हाजी की जान बचा ली। पैगंबर की मस्जिद के दक्षिणी आंगन में अचानक इस व्यक्ति की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उनकी सांसें रुक गई थीं। समय पर मिली मेडिकल मदद और टीम की फुर्ती ने एक व्यक्ति को नया जीवन दिया है।

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मदीना में क्या हुआ और टीम कितनी देर में पहुँची?

घटना बुधवार सुबह की है जब 5:28 बजे मेडिकल डिस्पैच सेंटर को एक इमरजेंसी की सूचना मिली। मदीना क्षेत्र में अथॉरिटी के महानिदेशक डॉ. अहमद अल ज़हरानी के मुताबिक, सूचना मिलते ही विशेष इमरजेंसी टीमों को तुरंत रवाना किया गया। ये टीमें बेहद कम समय में, सिर्फ 1 मिनट 5 सेकंड के भीतर मौके पर पहुँच गईं।

मरीज की हालत कैसी थी और जान कैसे बचाई गई?

जब मेडिकल टीम मौके पर पहुँची तो पाया कि 54 वर्षीय इंडोनेशियाई हाजी कार्डियक और रेस्पिरेटरी अरेस्ट की गंभीर स्थिति में थे, यानी उनके दिल और सांस की धड़कन रुक गई थी। टीमों ने बिना समय गंवाए तय मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रीससिटेशन) शुरू किया। आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से वे मरीज की धड़कन वापस लाने में सफल रहे और उनकी हालत को स्थिर किया गया।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी रेड क्रिसेंट टीम मदीना में कितनी देर में पहुँची?

मेडिकल डिस्पैच सेंटर को सूचना मिलने के बाद इमरजेंसी टीमें मात्र 1 मिनट 5 सेकंड में पैगंबर की मस्जिद के दक्षिणी आंगन में पहुँच गई थीं।

हाजी की जान बचाने के लिए कौन सा मेडिकल तरीका अपनाया गया?

54 वर्षीय इंडोनेशियाई हाजी को कार्डियक और रेस्पिरेटरी अरेस्ट हुआ था, जिसके लिए मेडिकल टीम ने मौके पर ही सीपीआर (CPR) किया और आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर उनकी धड़कन वापस लाई।