Saudi Space Mission: अंतरिक्ष में कोशिकाओं के जीन में हुए बड़े बदलाव, सऊदी वैज्ञानिकों ने खोजा गंभीर बीमारियों के इलाज का रास्ता
सऊदी अरब के अंतरिक्ष मिशन SSA-HSF1 ने विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. अंतरिक्ष के माहौल में कोशिकाओं के जीन में होने वाले बदलावों का पता चला है, जिससे अब कई गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिल सकती है. इस मिशन के जरिए सऊदी अरब ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नया और आधुनिक रास्ता खोला है.
सऊदी अंतरिक्ष मिशन में क्या खास मिला
सऊदी अरब ने अपने SSA-HSF1 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर कई वैज्ञानिक प्रयोग किए. इस दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि अंतरिक्ष के माहौल में कोशिकाओं के जीन की गतिविधि बदल जाती है. डॉक्टर खालिद अबू खबर अल-कुरशी और डॉक्टर विजदान अल-अहमदी के नेतृत्व में किए गए इन प्रयोगों से शरीर में होने वाली सूजन और बीमारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है. इसमें खास तौर पर mRNA के काम करने के तरीके पर रिसर्च की गई.
स्टेम सेल और नए इलाज पर काम
इस मिशन के दौरान पहली बार अंतरिक्ष में स्टेम सेल के लिए जीन ट्रांसफर का प्रयोग किया गया, जो भविष्य में अंगों के इलाज के लिए मददगार होगा. इसके अलावा, दिसंबर 2025 में यह खबर आई कि माइक्रो ग्रेविटी की मदद से कार्टिलेज रिपेयर के लिए एक नया नैनोमटेरियल बनाया गया है. यह सारी रिसर्च सऊदी विजन 2030 का हिस्सा है, जिसका मकसद देश में रिसर्च और नई तकनीक को बढ़ावा देना है.
मिशन में किन लोगों और संस्थाओं ने लिया हिस्सा
इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री रय्यानह बरनवी और अली अल-क़रनी ने हिस्सा लिया और 10 दिनों तक ISS पर रहकर रिसर्च की. इस पूरे काम में सऊदी स्पेस एजेंसी, किंग फैयाज स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल और अमेरिका के सीडर्स-सिनाई जैसे बड़े संस्थानों ने साथ काम किया. इस रिसर्च के नतीजों के बाद 11 शोध पत्र और एक पेटेंट भी जारी किए गए हैं, जो चिकित्सा जगत के लिए बहुत जरूरी हैं.