सऊदी अरब अपने वित्तीय बाज़ार में एक ऐतिहासिक बदलाव करने जा रहा है। सऊदी कैपिटल मार्केट अथॉरिटी (CMA) ने घोषणा की है कि 1 फ़रवरी से सऊदी शेयर बाज़ार (Tadawul) के दरवाज़े सभी विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिए जाएंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब सऊदी फाइनेंशियल मार्केट में निवेश केवल “क्वालिफ़ाइड” संस्थागत निवेशकों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा अब व्यापक होने जा रहा है।

अब सिर्फ चुनिंदा ‘क्वालिफाइड’ संस्थागत निवेशकों तक सीमित नहीं रहेगा बाज़ार, सभी को मिलेगा सीधा प्रवेश

इस बड़े फैसले के तहत, 1 फ़रवरी से मेन मार्केट में सभी श्रेणियों के गैर-निवासी (Non-resident) विदेशी निवेशकों को हिस्सा लेने की अनुमति दे दी जाएगी। यह कदम उस प्रक्रिया का अगला चरण है, जिसमें CMA ने मुख्य बाज़ार को सभी विदेशी निवेशकों के लिए खोलने को लेकर राय मांगी थी। “सभी कैटेगरी” के लिए बाज़ार खुलने का मतलब है कि अब व्यापक रूप से हर विदेशी निवेशक—चाहे वह इंडिविजुअल हो, कॉर्पोरेट हो या कोई फंड—अद्यतन नियमों और KYC प्रक्रिया को पूरा करके अपना खाता खोल सकेगा। अब वे सीधे सऊदी इक्विटी और अन्य सिक्योरिटीज में पैसा लगा सकेंगे, जिसके लिए पहले बहुत सीमित विकल्प मौजूद थे।

पहले कड़े नियमों और भारी-भरकम एसेट शर्तों के कारण केवल विशेष विदेशी निवेशक ही कर पाते थे ट्रेडिंग

इससे पहले की व्यवस्था काफी सख्त थी। सऊदी स्टॉक मार्केट में सीधी एंट्री केवल ‘क्वालिफाइड फॉरेन इन्वेस्टर्स’ (QFI) को ही मिलती थी। इन निवेशकों पर एसेट के आकार (Asset-size) और रेगुलेशन की कड़ी शर्तें लागू होती थीं। आम विदेशी निवेशक या छोटी संस्थाएं अक्सर सीधे शेयर नहीं खरीद पाती थीं, उन्हें स्वैप एग्रीमेंट या विशेष फंड्स के जरिए ही बाज़ार में एक्सपोज़र लेना पड़ता था। हालांकि 2024–25 में नियमों में कुछ ढील देकर सीमित एक्सेस दिया गया था, लेकिन मेन मार्केट में डायरेक्ट ट्रेडिंग पर अब भी कई तरह की पाबंदियां थीं, जिन्हें अब 1 फ़रवरी से हटाकर सिस्टम को पूरी तरह प्रैक्टिकल बनाया जा रहा है।

विदेशी निवेशकों के लिए 49 फीसदी की हिस्सेदारी सीमा और कड़े KYC नियमों के साथ संचालित होगा नया सिस्टम

बाज़ार खुलने के बावजूद स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ नियम जारी रहेंगे। मौजूदा ढांचे के मुताबिक, कई सेक्टर्स में प्रति विदेशी निवेशक के लिए लगभग 10% और कुल विदेशी होल्डिंग के लिए 49% तक की सीमा (Cap) लागू है। हालांकि, रेगुलेटरी बॉडीज इन सीमाओं की समीक्षा कर रही हैं और भविष्य में मेजोरिटी स्टेक (49% से ज्यादा) की संभावनाओं पर भी चर्चाएं हो रही हैं। इसके अलावा, स्ट्रैटेजिक विदेशी निवेशकों के लिए ‘लॉक-इन पीरियड’ (शेयर न बेच पाने की समय-सीमा) और सेक्टर-विशिष्ट नियम लागू रह सकते हैं, ताकि मार्केट के खुलने के साथ-साथ उस पर कंट्रोल और स्टेबिलिटी भी बनी रहे।

सऊदी विज़न 2030 के तहत लिक्विडिटी बढ़ाने और ग्लोबल इंडेक्स में वेटेज मज़बूत करने की बड़ी तैयारी

CMA और सऊदी सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य बाज़ार में नकदी का प्रवाह (Liquidity) और गहराई (Depth) बढ़ाना है। इससे MSCI और FTSE जैसे ग्लोबल इंडेक्स में सऊदी अरब का वज़न और मज़बूत होगा, जिससे परमानेंट कैपिटल इनफ़्लो देश में आएगा। यह फैसला सऊदी अरब को एक ‘फुल-फ्लेज्ड ओपन कैपिटल मार्केट हब’ बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इसे नए निवेश कानून (Investment Law), प्रीमियम रेज़िडेंसी प्रोडक्ट्स और रियल एस्टेट में विदेशी ओनरशिप बढ़ाने वाली नीतियों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जो विज़न 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा।

GulfHindi Desk

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