सऊदी अरब और तुर्की अब मिलकर खनिजों (minerals) की खोज और खुदाई पर काम करेंगे. इसके लिए सऊदी के उद्योग मंत्री और तुर्की के ऊर्जा मंत्री ने इस्तांबुल में खास मुलाकात की. यह डील दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए की गई है ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके.

सऊदी और तुर्की की मुलाकात में क्या चर्चा हुई?

इस्तांबुल में आयोजित OECD क्रिटिकल मिनरल्स फोरम के दौरान सऊदी अरब के उद्योग और खनिज संसाधन मंत्री Bandar bin Ibrahim Al-Khorayef और तुर्की के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री Alparslan Bayraktar की बैठक हुई. इस चर्चा में मुख्य रूप से क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान दिया गया. दोनों मंत्रियों ने माइनिंग सेक्टर में निवेश, नई तकनीक और सप्लाई चैन को बेहतर बनाने के तरीकों पर बात की. तुर्की के मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब के साथ यह ऊर्जा संवाद भविष्य में लंबे समय तक चलने वाली और उच्च मूल्य वाली साझेदारी में बदल जाएगा.

इस समझौते का सऊदी विजन 2030 से क्या संबंध है?

सऊदी अरब अपने विजन 2030 (Vision 2030) के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल पर निर्भर नहीं रखना चाहता. इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश अपने माइनिंग सेक्टर को विकसित कर रहा है. सऊदी और तुर्की ने खनिज खोज, उन्हें निकालने और प्रोसेसिंग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सितंबर 2023 में दोनों देशों के बीच माइनिंग सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे.

दोनों देशों के बीच पहले क्या तय हुआ था?

यह मुलाकात अचानक नहीं हुई, बल्कि इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे:

  • मार्च 2026: सऊदी-तुर्की कोऑर्डिनेशन काउंसिल की दूसरी बैठक हुई, जिसमें व्यापार, उद्योग और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए 22 साझा पहलों पर सहमति बनी थी.
  • फरवरी 2026: दोनों देश खनिज खोज और प्रोसेसिंग में गहराई से सहयोग करने पर राजी हुए ताकि ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन के लिए सप्लाई चैन सुरक्षित रहे.
  • इसके अलावा, दोनों देशों ने तेल, पेट्रोकेमिकल्स और हाइड्रोकार्बन के नए उपयोगों पर भी चर्चा की थी.

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी और तुर्की के मंत्रियों की बैठक कब और कहाँ हुई?

यह बैठक मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को इस्तांबुल में OECD क्रिटिकल मिनरल्स फोरम के मौके पर हुई थी.

इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, निष्कर्षण और प्रोसेसिंग में सहयोग बढ़ाना है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र की सप्लाई चैन सुरक्षित रहे और अर्थव्यवस्था मजबूत हो.