सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर हुए हालिया ड्रोन हमलों के बाद इराक सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इराकी सेना ने घोषणा की है कि इन हमलों की जांच के लिए बनाई गई विशेष कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही कमांडर-इन-चीफ और आम जनता के सामने पेश करेगी। इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इस मामले में पूरी सच्चाई सामने लाने के निर्देश दिए हैं ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।
ड्रोन हमलों की जांच के लिए बनी विशेष कमेटी क्या काम करेगी?
इराक के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम करने वाले मंत्री परिषद की पहली बैठक में इस उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
- यह कमेटी मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा का मूल्यांकन करेगी और रडार डेटा की बारीकी से जांच करेगी।
- हमले करने वाले अपराधियों ने किस रास्ते का इस्तेमाल किया, इसका पूरा रूट मैप तैयार किया जाएगा।
- प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने सऊदी अरब और UAE के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच करने का प्रस्ताव दिया है ताकि सभी सबूतों को सही ढंग से परखा जा सके।
- अगर यह साबित होता है कि हमले के लिए इराकी ज़मीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल हुआ था, तो अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी और सुरक्षात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इराकी सेना और सरकार ने सुरक्षा को लेकर क्या रुख अपनाया है?
इराक की सशस्त्र सेना ने साफ शब्दों में कहा है कि उनके भाई समान पड़ोसी देशों की सुरक्षा उनके लिए एक बेहद संवेदनशील मामला है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से लागू होगा।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इराक की धरती का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ हमले के लिए एक लॉन्चपैड के रूप में नहीं होने दिया जाएगा। सेना ने यह भी कहा कि हथियारों को केवल सरकार के नियंत्रण में रखना उनकी मुख्य सुरक्षा नीति का हिस्सा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब और UAE पर ये ड्रोन हमले 17 और 18 मई 2026 को हुए थे, जिसके बाद इराकी प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी अरब और UAE पर ड्रोन हमले कब हुए थे?
सऊदी अरब और UAE पर ड्रोन हमले 17 और 18 मई 2026 को हुए थे, जिसके बाद दोनों देशों ने इसके इराक से शुरू होने का दावा किया था।
इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने इस हमले पर क्या फैसला लिया?
प्रधानमंत्री ने हमले की निंदा की और एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया, जो रडार डेटा और सीमा सुरक्षा की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी।