सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रेगिस्तान को हरा-भरा करने और अपनी खेती बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े प्लान चल रहे हैं। विजन 2030 के तहत अरबों डॉलर खर्च करने की बात हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। फरवरी 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ये दोनों देश अपनी जरूरत का 85% से 90% खाना आज भी दूसरे देशों से मंगा रहे हैं। बढ़ती आबादी और टूरिज्म के कारण खाने की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसे पूरा करने के लिए विदेशी बाज़ारों पर निर्भरता बनी हुई है।

कितना खाना बाहर से आ रहा है?

आंकड़े बताते हैं कि स्थानीय उत्पादन अभी मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। सऊदी अरब ने 2024-25 के दौरान लगभग 10.8 बिलियन डॉलर का खाने-पीने का सामान बाहर से मंगवाया है। यह किंगडम में सबसे ज्यादा इंपोर्ट होने वाली चीजों में छठे नंबर पर है।

दुबई की बात करें तो वहां हालात और भी चौंकाने वाले हैं। दुबई स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2024 की पहली छमाही में दुबई ने 5.2 मिलियन टन खाना इंपोर्ट किया, जो पिछले साल के मुकाबले 15% ज्यादा है। आम लोगों और यहां रहने वाले भारतीयों को आज भी सुपरमार्केट में लोकल सब्जी के मुकाबले भारत, ब्राजील और तुर्की से आया सामान ज्यादा सस्ता और आसानी से मिल रहा है।

रमजान के लिए क्या हैं नए नियम?

रमजान का महीना करीब है और इसे देखते हुए UAE सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। 11 फरवरी से 24 फरवरी 2026 के बीच जारी आदेश के मुताबिक, 9 जरूरी चीजों के दाम बढ़ाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। दुकानदार बिना सरकार की मर्जी के इनके रेट नहीं बढ़ा सकते।

  • कुकिंग ऑयल (तेल)
  • अंडे और डेयरी प्रोडक्ट
  • चावल और चीनी
  • मुर्गा (Poultry)
  • दालें, ब्रेड और गेहूं

इसके अलावा, दुबई में खाने की सुरक्षा को लेकर ‘मोंटाजी पोर्टल’ (Montaji Portal) सख्ती से लागू है। जो भी प्रोडक्ट दुबई में आएगा, उसका इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। अगर कोई नियम तोड़ता है, तो उस पर 20 लाख दिरहम तक का भारी जुर्माना लग सकता है।

कंपनियां क्या कर रही हैं?

खेती को बढ़ावा देने के लिए सऊदी की कंपनी SALIC और NEOM का Topian प्रोजेक्ट लगातार काम कर रहे हैं। SALIC ने पिछले चार सालों में अपनी संपत्ति 500% बढ़ाई है और दुनिया भर से गेहूं और अनाज लाने के लिए निवेश किया है।

वहीं, 24 फरवरी 2026 को एक नया समझौता हुआ है। सऊदी की कंपनी ‘Dan’ और UAE की ‘Fresh On Table’ ने हाथ मिलाया है। इसका मकसद सऊदी के किसानों को सीधे बड़े होटलों और रेस्टोरेंट से जोड़ना है, ताकि बाहर से आने वाले महंगे सामान की जगह लोकल उपज का इस्तेमाल बढ़ सके। हालांकि, जानकारों का कहना है कि पूरी तरह आत्मनिर्भर होने में अभी लंबा वक्त लगेगा और फिलहाल भारत जैसे देशों से आने वाला राशन ही यहां की लाइफलाइन बना हुआ है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com