सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद और ब्रिटेन की विदेश मंत्री इवेत्त कूपर के बीच लंदन में एक अहम मुलाकात हुई। इस बैठक में मध्य पूर्व के हालातों और वहां की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने इलाके में शांति बनाए रखने और व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
Strait of Hormuz और व्यापारिक रास्तों पर क्या फैसला हुआ?
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की पूरी आजादी होनी चाहिए। दोनों मंत्रियों ने साफ कहा कि इस समुद्री रास्ते को राजनीतिक या आर्थिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इस रास्ते में कोई रुकावट आती है, तो इसका बुरा असर पूरी दुनिया के व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर पड़ेगा।
लंदन की इस बैठक में कौन लोग शामिल थे?
इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के बड़े अधिकारी मौजूद थे, जिनके नाम नीचे दिए गए हैं:
- प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद: सऊदी विदेश मंत्री
- इवेत्त कूपर: ब्रिटिश विदेश सचिव
- प्रिंस अब्दुल्ला बिन खालिद बिन सुल्तान: ब्रिटेन में सऊदी राजदूत
- वलीद अल-समाईल: विदेश मंत्री कार्यालय के महानिदेशक
- मोहम्मद अल-यहीया: विदेश मंत्री के सलाहकार
शांति के लिए पहले क्या कदम उठाए गए?
यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर बात हुई हो। इससे पहले 2 अप्रैल 2026 को ब्रिटेन की अगुवाई में 35 देशों की एक मीटिंग हुई थी, जिसमें Strait of Hormuz को फिर से खोलने पर चर्चा हुई थी। उस समय ईरान की उन हरकतों की निंदा की गई थी जो अंतरराष्ट्रीय जहाजों के रास्ते में रुकावट डालती हैं। साथ ही, 12 मार्च 2026 को रियाद में हुई एक बैठक में ब्रिटेन ने ईरान द्वारा सऊदी अरब और अन्य देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की थी और स्थिरता की बात कही थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी और ब्रिटेन की यह मीटिंग कब और कहां हुई?
यह महत्वपूर्ण बैठक 12 मई 2026 को लंदन में आयोजित की गई थी।
Strait of Hormuz को लेकर मुख्य चिंता क्या है?
मुख्य चिंता यह है कि इस रास्ते का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के लिए न किया जाए, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार के लिए बहुत जरूरी है और इसमें रुकावट आने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
