सऊदी अरब और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने एक अहम बैठक की है। इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर विस्तार से बात हुई। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इस समुद्री रास्ते से जहाजों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक के होना चाहिए ताकि दुनिया भर में स्थिरता बनी रहे।
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने खाड़ी देशों का दौरा किया, जिसमें सऊदी अरब के साथ-साथ UAE, कुवैत और बहरीन भी शामिल थे। इस दौरान उन्होंने बहरीन में हुई GCC बैठक में भी हिस्सा लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग किसी एक देश की जागीर नहीं होते। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी देश ने टैक्स या फीस वसूलने की कोशिश की, तो इससे पूरी दुनिया में अफरातफरी मच सकती है।
जानकारी के मुताबिक, 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच एक इलेक्ट्रॉनिक समझौता (MoU) हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद को खत्म करना और स्थायी शांति लाना है। इस समझौते में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ के तौर पर काम किया और 18 जून को इस पर हस्ताक्षर हुए।
सऊदी अरब ने 15 जून 2026 को इस समझौते का स्वागत किया था। सऊदी कैबिनेट ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही वैसी ही बहाल होनी चाहिए, जैसी 28 फरवरी 2026 से पहले थी। वहीं ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad Al Busaidi ने भी 25 जून को ऐलान किया कि भविष्य में इस समुद्री रास्ते के लिए कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी।
हालांकि, इस पूरे मामले में कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह समुद्री फीस लगा सकता है। साथ ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि जहाजों को केवल उन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करना होगा जो तेहरान द्वारा तय किए गए हैं। इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने को लेकर भी बातचीत में मुश्किलें आ रही हैं।
