इराक में 29 जुलाई 2026 को सऊदी अरब और अमेरिका ने एक साझा सैन्य कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में ईरान समर्थित मिलिशिया को निशाना बनाया गया, जिसमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कम से कम 5 सदस्यों की जान गई है। मरने वालों में 4 लोग ईरान के कशान, इस्फ़हान प्रांत के थे जो IRGC की खुफिया सुरक्षा इकाई से जुड़े थे, वहीं 5वां व्यक्ति IRGC की कुद्स फोर्स का सदस्य बताया जा रहा है।
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हमले की वजह और सरकारी प्रतिक्रिया
यह संयुक्त हमला पिछले 72 घंटों में इराक की सीमा से हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया। ये हमले सऊदी अरब की तेल सुविधाओं और अमेरिकी सेना को निशाना बनाकर किए गए थे। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उन्होंने पूर्वी इराक में ईरान समर्थित आतंकवादियों के हथियार डिपो और लॉजिस्टिक ठिकानों को नष्ट किया है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इन मिलिशिया समूहों को दुनिया के लिए खतरा बताया है।
इराक का विरोध और तनाव
इस हमले के बाद इराक सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने सऊदी अरब की अपनी प्रस्तावित यात्रा को स्थगित कर दिया है और आपातकालीन सुरक्षा बैठक बुलाई है। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) ने जानकारी दी है कि उनके 20 सदस्य मारे गए और 32 घायल हुए हैं। यह हमला बगदाद, वासित, निनवेह, बसरा, किरकुक, करबला और दियाला जैसे कई क्षेत्रों में हुआ। फिलहाल CENTCOM ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान समर्थित समूह अपने हमले नहीं रोकते हैं तो आगे भी कड़ी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
