सऊदी अरब और अमेरिका के बीच एक नए रीइंश्योरेंस (पुनर्बीमा) समझौते की चर्चा सोशल मीडिया पर तेज़ है। इस खबर के बीच सऊदी अरब के इंश्योरेंस अथॉरिटी ने विदेशी कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन के नियम काफी सख्त कर दिए हैं। यह बदलाव आने वाले समय में बीमा क्षेत्र और यहाँ काम करने वाली कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
विदेशी बीमा कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन के नए नियम
सऊदी इंश्योरेंस अथॉरिटी (IA) ने सभी विदेशी रीइंश्योरेंस कंपनियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य कर दिया है। इसकी आखिरी तारीख 1 मार्च 2026 तय की गई थी। इस नियम का मुख्य मकसद पारदर्शिता लाना और सरकारी मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। अब सऊदी अरब की लाइसेंस प्राप्त बीमा कंपनियों और ब्रोकरों को किसी भी विदेशी कंपनी के साथ समझौता करने से पहले उनका रजिस्ट्रेशन स्टेटस चेक करना होगा।
स्थानीय कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए
सऊदी सरकार अब अपनी घरेलू बीमा कंपनियों को मजबूत करना चाहती है। इसके लिए 1 जनवरी 2025 से नया नियम लागू हुआ है, जिसके तहत लोकल इंश्योरेंस कंपनियों को अपने कुल रीइंश्योरेंस का 30% हिस्सा पहले घरेलू कंपनियों को देना होगा। इसी कड़ी में Saudi Re ने 29 अप्रैल 2026 को Medgulf के साथ एक साल का रीइंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है, जिसका असर कंपनी के 2026 के वित्तीय परिणामों में दिखेगा।
अमेरिका और गल्फ क्षेत्र में बीमा की स्थिति
अमेरिकी प्रशासन ने मार्च 2026 में शिपिंग कंपनियों के लिए रीइंश्योरेंस और सैन्य सुरक्षा देने की पेशकश की थी, खासकर उन टैंकरों के लिए जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी कंपनी Chubb Ltd. के सीईओ ने अप्रैल 2026 में फारस की खाड़ी क्षेत्र के लिए 40 अरब डॉलर की रीइंश्योरेंस सुविधा का जिक्र किया था, हालांकि यह वहां की सैन्य स्थितियों पर निर्भर करता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विदेशी रीइंश्योरेंस कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख क्या थी?
सऊदी इंश्योरेंस अथॉरिटी (IA) के निर्देशानुसार, सभी विदेशी कंपनियों को 1 मार्च 2026 तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करना था।
स्थानीय बीमा कंपनियों के लिए 30% वाला नियम क्या है?
1 जनवरी 2025 से लागू नियम के मुताबिक, सऊदी अरब की लोकल इंश्योरेंस कंपनियों को अपना 30% रीइंश्योरेंस हिस्सा सबसे पहले देश की घरेलू कंपनियों को देना होगा।