सऊदी अरब ने अपने विजन 2030 के तीसरे और आखिरी चरण में कदम रख दिया है। आर्थिक और विकास मामलों की परिषद (EDAC) ने 27 अप्रैल 2026 को बताया कि विजन 2030 के 93% प्रदर्शन संकेतक अपने सालाना लक्ष्यों को पूरा कर चुके हैं या उनके काफी करीब हैं। यह बदलाव देश की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी है।
विजन 2030 के तहत अर्थव्यवस्था और रोजगार में क्या सुधार हुए हैं?
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था अब केवल तेल पर निर्भर नहीं रही। गैर-तेल क्षेत्र अब देश की कुल अर्थव्यवस्था के आधे से ज्यादा हिस्से का योगदान दे रहे हैं। साथ ही, देश में बेरोजगारी की दर में भी बड़ी गिरावट आई है। नीचे दी गई टेबल में मुख्य आंकड़े दिए गए हैं:
| इंडिकेटर (Indicator) | स्थिति/वैल्यू (Status/Value) |
|---|---|
| रियल जीडीपी ग्रोथ (2025) | 4.5% |
| सऊदी बेरोजगारी दर (2025 के अंत तक) | 7.2% (2016 में 12.3% थी) |
| महंगाई दर (2025) | 2.0% |
| वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स (2026) | 22वां स्थान (पहले 37वें पर था) |
| गैर-तेल क्षेत्र का योगदान | अर्थव्यवस्था के 50% से अधिक |
| AI गवर्नमेंट स्ट्रेटजी इंडेक्स | दुनिया में पहला स्थान |
संस्कृति, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में क्या बदलाव आए हैं?
विजन 2030 के कारण सऊदी अरब में सांस्कृतिक गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिला है। अब संस्कृति से जुड़ी सरकारी संस्थाओं की संख्या बढ़कर 13 से ज्यादा हो गई है। इसके अलावा, सऊदी स्टैंडर्ड क्लासिफिकेशन ऑफ ऑक्यूपेशन्स में 80 से ज्यादा नए सांस्कृतिक पेशे जोड़े गए हैं।
- यूनेस्को (UNESCO): दुनिया की सांस्कृतिक विरासत सूची में सऊदी अरब के 8 नए स्थलों को शामिल किया गया।
- ई-स्पोर्ट्स: सऊदी अरब ने दुनिया का पहला ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप आयोजित किया।
- पहल (Initiatives): विजन 2030 की कुल 1290 पहलों में से 90% काम पूरे हो चुके हैं या तय योजना के हिसाब से चल रहे हैं।
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने विजन 2030 पर क्या कहा?
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि विजन 2030 की वजह से देश के विकास में एक बड़ा बदलाव आया है। यह बदलाव आर्थिक, सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स जैसे हर क्षेत्र में देखा जा सकता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस पूरे विजन का सबसे महत्वपूर्ण निवेश देश के नागरिकों के भविष्य पर रहा है और आगे भी यही जारी रहेगा। अब 2026 से 2030 तक चलने वाले तीसरे चरण में मौजूदा जरूरतों के हिसाब से काम करने के तरीकों को बदला जाएगा ताकि लक्ष्य समय पर पूरे हो सकें।