Saudi Yanbu Port: हूती नौसेना की नाकाबंदी के बाद सऊदी अरब के यानबु बंदरगाह पर जहाजों की आवाजाही एक-तिहाई से अधिक घटी.

Praggya Singh sabal22 August 20263 min read51 viewsSaudi
Saudi Yanbu Port: हूती नौसेना की नाकाबंदी के बाद सऊदी अरब के यानबु बंदरगाह पर जहाजों की आवाजाही एक-तिहाई से अधिक घटी.

सऊदी अरब के मुख्य लाल सागर तेल टर्मिनल यानबु बंदरगाह पर टैंकरों की आवाजाही में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 20 जुलाई 2026 को हूती सशस्त्र समूह द्वारा बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने वाली नौसेना नाकाबंदी की घोषणा के बाद से यहाँ समुद्री गतिविधि एक-तिहाई से अधिक कम हो गई है। यूके स्थित फर्म लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस के डेटा से इस बात की पुष्टि हुई है कि समुद्री यातायात में काफी कमी आई है। यह नाकाबंदी सना हवाई अड्डे पर सऊदी हवाई हमलों के जवाब में शुरू की गई थी। हूती सैन्य प्रवक्ता याहया सारेई ने बताया कि प्रतिबंध शुरू होने के बाद से उनके बलों ने आठ सऊदी तेल जहाजों को निशाना बनाया है, जिनमें लाल सागर में पांच और अदन की खाड़ी तथा अरब सागर में तीन जहाज शामिल हैं। इसके अलावा 48 अन्य जहाजों को पीछे लौटने के लिए मजबूर किया गया, जिनमें अरब सागर और हिंद महासागर में 34 और लाल सागर में 14 जहाज शामिल हैं।

हूती समूह की नई धमकियां और रणनीतिक जोखिम

हूती नेताओं ने उत्तरी लाल सागर तक अपनी इस नाकाबंदी का दायरा बढ़ाने का संकल्प लिया है। उन्होंने इसके पीछे 5 अगस्त को यानबु के पास सऊदी ध्वज वाले टैंकर NCC WAFA पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले का हवाला दिया है। हूती नेता अब्दुल-मालिक अल-हूती ने घोषणा की है कि किसी भी सऊदी कार्रवाई का उसी के अनुसार जवाब दिया जाएगा। उनके तीन मुख्य नियम हैं समुद्री नाकाबंदी, सैन्य ठिकानों पर हमले और यमनी संप्रदाय की रक्षा करना। समुद्री खुफिया फर्म विंडवर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यानबु बंदरगाह अब सामान्य एआईएस-सक्रिय ऑपरेशन से पूरी तरह एआईएस-डार्क ऑपरेशन में बदल गया है, ताकि जहाज हूती हमलों से बच सकें। वहीं केप्लर शिपिंग डेटा के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को बाब अल-मदब से केवल ग्यारह कार्गो जहाजों के गुजरने का बहु-माह का निचला स्तर दर्ज किया गया। विंडवर्ड ने लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य, अदन की खाड़ी और उत्तरी अरब खाड़ी में परिचालन जोखिम को 'क्रिटिकल' श्रेणी में रखा है।

सऊदी अरब की तरफ से जवाबी कदम और शटल टैंकरों का इस्तेमाल

इस स्थिति से निपटने के लिए सऊदी ऊर्जा दिग्गज अरामको ने एक खास योजना बनाई है, जिसके तहत कच्चे तेल को यानबु से मिस्र के एन सुखना तक ले जाने के लिए शटल टैंकरों का उपयोग किया जा रहा है। इसके बाद सुमेद पाइपलाइन के जरिए तेल को भूमध्यसागरीय बंदरगाह सिदी केरिरी तक पहुँचाया जाता है ताकि वहाँ से दोबारा लोडिंग हो सके। हालाँकि इससे आपूर्ति तो बनी रहती है, लेकिन एशियाई खरीदारों के लिए रसद लागत और यात्रा का समय काफी बढ़ जाता है। सऊदी के नेतृत्व वाला गठबंधन इस पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कह रहा है और एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन बनाने में जुटा है। अब तक सऊदी रक्षा मंत्रालय ने लगभग पचास देशों से परामर्श किया है, जिसमें तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान और नाइजीरिया सहित कम से कम तेरह देशों से समर्थन के आश्वासन मिले हैं। इस बीच, यमनी सूचना मंत्री मोअम्मर अल-इरियानी ने 19 अगस्त 2026 को चेतावनी दी थी कि हूती बल बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास के इलाकों पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद से सऊदी अरब के लिए इस जलमार्ग का सामरिक महत्व बहुत बढ़ गया है।

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