यमन के हद्रमौत इलाके में बिजली की किल्लत को दूर करने के लिए सऊदी अरब ने एक बड़ी पहल शुरू की है। अल-मुकल्ला शहर में पावर प्लांट प्रोजेक्ट की नींव रखी गई है, जिससे तटवर्ती इलाकों में बिजली की सप्लाई बढ़ेगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए वहां के लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।

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पावर प्लांट से कितनी बिजली मिलेगी और कहां होगा काम?

इस प्रोजेक्ट के तहत हद्रमौत तट के लिए कुल 100 मेगावाट क्षमता के पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से दो स्टेशन शामिल हैं:

  • जौल मसाह स्टेशन: यहां 40 मेगावाट बिजली पैदा होगी।
  • अम्बिखा स्टेशन: यहां 60 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।

इसके अलावा, भविष्य में हद्रमौत के घाटी और रेगिस्तानी इलाकों के लिए एक और प्लांट लगाने की योजना है, जिससे 100 मेगावाट बिजली और मिलेगी। Gulf Power International (GPI) का लक्ष्य कुल 300 मेगावाट का प्लांट देना है, जिसमें 200 मेगावाट हद्रमौत और 100 मेगावाट अदन के लिए होगा।

प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किसकी है और कौन सी तकनीक इस्तेमाल होगी?

इस पूरे प्रोजेक्ट की फंडिंग Saudi Program for the Development and Reconstruction of Yemen (SDRPY) कर रहा है। इसे लागू करने के लिए यमन के बिजली और ऊर्जा मंत्रालय और Gulf Power International (GPI) के बीच समझौता हुआ है। यह प्रोजेक्ट Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल पर आधारित है।

बिजली प्लांट के संचालन के लिए आधुनिक AI और IoT कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे UNUM द्वारा विकसित किया गया है। साथ ही, लाइव अपडेट के लिए Starlink कनेक्टिविटी का उपयोग होगा ताकि खब़र मुख्यालय से इसकी निगरानी की जा सके।

सऊदी अरब की अन्य मदद और अधिकारियों का क्या कहना है?

सऊदी अरब ने सिर्फ प्लांट ही नहीं, बल्कि बिजली सेक्टर को सहारा देने के लिए 25 जनवरी 2026 से यमन के 70 से ज्यादा पावर स्टेशनों को तेल डेरिवेटिव्स की सप्लाई शुरू कर दी है।

कार्यक्रम के दौरान हद्रमौत के गवर्नर सालेम अल-खानबशी और SDRPY के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि इस कदम से यमन की अर्थव्यवस्था स्थिर होगी और स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसी जरूरी सेवाओं में सुधार आएगा।