Saudi Arabia और Yemen में फिर छिड़ी जंग, Houthi विद्रोहियों के हमलों से खतरे में पड़ा शांति समझौता.

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच एक बार फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जिससे पूरे इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के यमन के लिए विशेष दूत Hans Grundberg ने चेतावनी दी है कि यह नया टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। इस ताजा घटनाक्रम ने आम लोगों और वहां रहने वाले प्रवासियों की चिंता को भी बढ़ा दिया है, क्योंकि इससे क्षेत्र की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।
हूती विद्रोहियों के लगातार हमले और तबाही
यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के ठिकानों पर फिर से सफल हमले किए हैं। हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल करके यमन के मोचा क्षेत्र और मारिब प्रांत के तादाविन शिविर में सऊदी सैनिकों के जमावड़े, हथियारों के गोदामों और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। उनका कहना है कि इन हमलों में कई लोग हताहत हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे सऊदी अरब के खिलाफ अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखेंगे, क्योंकि सऊदी सरकार ने 2005 से लगाए गए एयर और सी नाकाबंदी का फायदा उठाया है।
हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी सैन्य परिवहन पोत पर भी हमला किया। इसके अलावा 12 अगस्त को बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में एक कमर्शियल जहाज Tihamah पर मिसाइल से हमला किया गया, जिसमें चार क्रू मेंबर और दो यमनी बचाव कर्मियों सहित कुल छह लोगों की मौत हो गई। इसके बाद 13 अगस्त को मोखा के बंदरगाह पर भी मिसाइलें दागी गईं। मारिब में विस्थापितों के कैंपों और रिहायशी इलाकों पर हुए हमलों में दो लोगों की मौत हो गई और 14 लोग घायल हो गए। अल जज़ीरा इंग्लिश के डिफेंस एडिटर Alex Gatopoulos ने 13 अगस्त 2026 को इन नए हमलों पर अपनी खास रिपोर्ट दी थी।
सऊदी अरब और यमन सरकार का रुख
दूसरी तरफ, सऊदी अरब का कहना है कि यमन के अंदर उसका कोई भी सैन्य बल मौजूद नहीं है। सऊदी सरकार के मुताबिक, उसकी भूमिका सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का समर्थन करने और अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने तक ही सीमित है। हालांकि, ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि सऊदी अरब यमन के एक जमीनी अभियान का समर्थन करने पर विचार कर रहा है।
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) के चेयरमैन Rashad al-Alimi ने हूतियों की इन हरकतों का कड़ा जवाब देने की बात कही है। उन्होंने हूती विद्रोहियों से अपने हथियार डालने और देश की राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है। अप्रैल 2022 में हुए संघर्षविराम के टूटने के बाद से यह स्थिति पैदा हुई है। जुलाई की शुरुआत में तब तनाव और बढ़ गया जब सऊदी नीत गठबंधन ने सना और ईरान के बीच यमनी सरकार की अनुमति के बिना होने वाली हूती उड़ानों को रोक दिया था। इन सभी हालातों को देखते हुए UN Security Council ने यमन के मामलों पर एक बैठक भी बुलाई है, जिसमें विशेष दूत ग्रुंडबर्ग ने साफ किया कि देश अप्रैल 2022 के समझौते के बाद से अब तक के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है।