बैंक अकाउंट्स आमतौर पर सेविंग्स और करंट अकाउंट में विभाजित होते हैं, और इन दोनों के बीच फायदे और फीचर्स में कई अंतर होते हैं। लेकिन आमतौर पर लोग इन अंतरों के बारे में सही जानकारी नहीं रखते हैं। इसलिए यह जानकारी अच्छे से समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

चालू खाता: क्या है?

करंट अकाउंट को आमतौर पर चालू खाता के रूप में जाना जाता है। इस खाते में पैसों का लेन-देन किया जाता है, लेकिन इसमें कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। यह खाता विशेषकर उनके लिए होता है जो नियमित रूप से बड़ी मात्रा में पैसों का लेन-देन करते हैं, जैसे कि व्यापारिक उद्यमों के लिए। यहाँ पर कोई भी नियमित बैलेंस या मिनिमम बैलेंस की आवश्यकता नहीं होती है, जो सेविंग्स अकाउंट में होती है।

सेविंग्स और करंट अकाउंट के फीचर्स

सेविंग्स और करंट अकाउंट दोनों में ही मिनिमम बैलेंस की आवश्यकता होती है। लेकिन सेविंग्स अकाउंट में जीरो बैलेंस अकाउंट और सैलरी अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने की छूट मिलती है, जो करंट अकाउंट में नहीं होती। दूसरी ओर, करंट अकाउंट में मिनिमम बैलेंस सेविंग्स अकाउंट से थोड़ा अधिक होता है।

सेविंग्स अकाउंट में महीने में किए जाने वाले ट्रांजैक्शन की लिमिट होती है, जबकि करंट अकाउंट में ऐसी कोई लिमिट नहीं होती है। सेविंग्स अकाउंट में जमा राशि पर ब्याज मिलता है और यह इनकम टैक्स के दायरे में आता है, जबकि करंट अकाउंट में कोई ब्याज नहीं मिलता है, और यह टैक्स के दायरे से बाहर होता है।

सेविंग्स अकाउंट और करंट अकाउंट की तुलना:

फीचर्स सेविंग्स अकाउंट करंट अकाउंट
मिनिमम बैलेंस की आवश्यकता हाँ (लेकिन छूट उपलब्ध) हाँ
ट्रांजैक्शन की लिमिट हाँ नहीं
ब्याज हाँ (इनकम टैक्स के दायरे में) नहीं (टैक्स के दायरे से बाहर)
उपयुक्त उद्यमों के लिए नहीं हाँ