एसबीआई का बड़ा ऐलान, अक्टूबर 2026 से बीएसबीडी खातों से पैसे निकालने पर लगेगा नया चार्ज.

भारतीय स्टेट बैंक यानी State Bank of India ने अपने ग्राहकों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है, जिसके तहत बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट यानी BSBD खातों से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। बैंक की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ब्रांच चैनल के माध्यम से खोले गए इन खास खातों से कैश निकालने के नियमों में संशोधन किया गया है, जो आने वाले October 1, 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा। इस नए बदलाव के बारे में बैंक ने गत August 19 and 20, 2026 को अपनी आधिकारिक सार्वजनिक सूचना और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सभी खाताधारकों को जानकारी दी है।
कितने ट्रांजैक्शन मिलेंगे मुफ्त
नई नीति के लागू होने के बाद भी खाताधारकों को राहत दी गई है, जिसके तहत वे हर महीने बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 4 free cash withdrawals कर सकेंगे। इसका मतलब है कि महीने में पहली चार बार पैसे निकालने पर बैंक की तरफ से कोई भी पैसा नहीं काटा जाएगा। लेकिन जैसे ही कोई ग्राहक महीने में इस तय सीमा से अधिक बार नकदी निकालेगा, तो उसे प्रति ट्रांजैक्शन ₹15 plus GST का शुल्क चुकाना होगा। बैंक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन चार मुफ्त लेन-देन के दायरे में भारतीय स्टेट बैंक के अपने एटीएम, अन्य बैंकों के एटीएम, बैंक शाखा यानी ब्रांच चैनल और डिजिटल माध्यमों से किए जाने वाले सभी तरह के नकद निकासी के तरीके शामिल होंगे।
डिजिटल लेनदेन पर क्या रहेगा असर
बैंक का यह नया कदम मुख्य रूप से परिचालन लागत को संतुलित करने और देश भर में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इन नए शुल्कों के आने के बावजूद सभी प्रकार के डिजिटल ट्रांजैक्शन पूरी तरह से मुफ्त बने रहेंगे और उन पर किसी भी तरह की कोई रोक या सीमा नहीं लगाई जाएगी। ग्राहक बिना किसी चिंता के अपने मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए ऑनलाइन लेनदेन जारी रख सकते हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती
बेसिक खातों के शुल्कों में बदलाव करने के साथ-साथ बैंक ने घरेलू फिक्स्ड डिपॉजिट यानी Fixed Deposits की ब्याज दरों में भी संशोधन किया है। बैंक ने ₹3 crore and above यानी तीन करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि वाले बल्क घरेलू फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज की दरों में कमी की घोषणा की है। इस वित्तीय बदलाव का असर उन बड़े निवेशकों और खाताधारकों पर पड़ेगा जो इस श्रेणी में अपनी बड़ी रकम जमा करते हैं। बैंक के इन सभी फैसलों का उद्देश्य वित्तीय प्रबंधन को बेहतर करना और देश के बैंकिंग ढांचे को आधुनिक बनाना है।