ईरान के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO ने इस मामले में गहरी चिंता जताई है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इसराइल ने मिलकर उसके नेटवर्क सिस्टम को निशाना बनाया है। अब यह मामला दुनिया के बड़े संगठनों के सामने पहुंच गया है।
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SCO ने ईरान के समर्थन में क्या कहा?
SCO के सदस्य देशों ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और उसकी सीमाओं का सम्मान होना चाहिए। संगठन ने सभी देशों से संयम बरतने को कहा है ताकि हालात और ज्यादा न बिगड़ें। SCO ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद से भी अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय शांति को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएं।
साइबर हमलों में किन चीजों को निशाना बनाया गया?
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में Cisco, Juniper, Fortinet और MikroTik जैसे नेटवर्किंग उपकरणों को खराब किया गया। अमेरिका ने ‘Operation Epic Fury’ के जरिए ईरान के संचार तंत्र पर साइबर हमले किए थे। दूसरी तरफ, अमेरिका की CISA और FBI ने भी चेतावनी जारी की है कि ईरान से जुड़े समूह अमेरिका के पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसे जरूरी सेक्टरों के सिस्टम को निशाना बना रहे हैं।
ईरान अब क्या कदम उठा रहा है?
ईरान के संचार मंत्री ने साफ तौर पर कहा है कि वे इन साइबर हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालतों में जाएंगे। ईरान का आरोप है कि ये हमले उसी शासन ने किए हैं जिसने पहले ‘Stuxnet’ जैसे खतरनाक साइबर हथियार इस्तेमाल किए थे। मार्च 2026 से यह साइबर टकराव और ज्यादा बढ़ गया है, जिससे दोनों तरफ के डिजिटल सिस्टम खतरे में हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
SCO ने ईरान के मामले में क्या मांग की है?
SCO ने ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता बनाए रखने की बात कही है और संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
ईरान पर हुए साइबर हमलों का असर क्या रहा?
इन हमलों की वजह से ईरान के कई नेटवर्किंग डिवाइस खराब हुए और वहां के संचार तंत्र को निशाना बनाया गया जिससे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुआ।