शारजाह ने अपनी पुरानी विरासतों को बचाने और उन्हें दुनिया के सामने लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 13 मई 2026 को शारजाह आर्कियोलॉजी अथॉरिटी (SAA) ने आधिकारिक तौर पर वर्ल्ड हेरिटेज ऑफिस की शुरुआत की। यह ऑफिस अंतरराष्ट्रीय नियमों के हिसाब से ऐतिहासिक जगहों की देखरेख और सुरक्षा का काम करेगा।
वर्ल्ड हेरिटेज ऑफिस क्यों बनाया गया और इसका क्या काम होगा?
इस ऑफिस को बनाने का मुख्य मकसद शारजाह की पुरानी और ऐतिहासिक जगहों को बेहतर तरीके से मैनेज करना है। शारजाह के शासक शेख डॉ सुल्तान बिन मोहम्मद अल कासिमी ने 29 अप्रैल 2026 को एक फरमान जारी किया था, जिससे इस अथॉरिटी के ढांचे को मंजूरी मिली। अब यह ऑफिस उन साइट्स की सुरक्षा करेगा जो पहले से लिस्ट में हैं या जिन्हें भविष्य में शामिल किया जा सकता है। SAA के डायरेक्टर जनरल ईसा यूसिफ ने बताया कि फया के यूनेस्को लिस्ट में शामिल होने के बाद अब इन विरासतों को संभालना और भी ज़रूरी हो गया है।
फया और अन्य ऐतिहासिक साइट्स के लिए क्या योजना है?
जुलाई 2025 में फया (Faya) को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था, जो यूएई की दूसरी ऐसी साइट बनी। इसके साथ ही फरवरी 2026 में Wadi Al Helou, Al Faya, Al Nahwa और खोरफक्कन के ऐतिहासिक किलों को ISESCO की लिस्ट में जगह मिली। इन विरासतों पर रिसर्च करने के लिए शारजाह सरकार ने 20 लाख दिरहम (AED 2 million) का रिसर्च ग्रांट भी दिया है, जिसकी देखरेख यह नया ऑफिस करेगा।
साइट्स को बचाने के लिए कौन से विभाग मिलकर काम कर रहे हैं?
फया वर्ल्ड हेरिटेज साइट के आसपास होने वाले विकास कार्यों को कंट्रोल करने के लिए 9 सरकारी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें टाउन प्लानिंग, हाउसिंग डिपार्टमेंट, रोड्स एंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, बिजली और पानी विभाग (SEWA), और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट जैसे विभाग शामिल हैं। इनका मकसद यह पक्का करना है कि नए निर्माण के दौरान पुरानी विरासतों की असलियत और उनकी कीमत बनी रहे और उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
फया (Faya) साइट यूनेस्को की लिस्ट में कब शामिल हुई थी?
फया पैलियोलैंडस्केप को जुलाई 2025 में पेरिस में हुई यूनेस्को की 47वीं बैठक के दौरान वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था।
शारजाह सरकार ने रिसर्च के लिए कितने पैसे दिए हैं?
शारजाह सरकार ने फया वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए 20 लाख दिरहम (AED 2 million) का अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ग्रांट प्रोग्राम शुरू किया है।
