Shivamogga ISIS Case: बेंगलुरु कोर्ट का बड़ा फैसला, आतंकी साजिश में शामिल तीसरे आरोपी को 6 साल की जेल

बेंगलुरु की एक NIA स्पेशल कोर्ट ने शिवमोगा ISIS साजिश मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीसरे आरोपी अराफात अली को दोषी पाते हुए 6 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला साल 2022 का है जिसमें आतंकी संगठन ISIS के लिए काम करने और युवाओं को भड़काने का आरोप था।

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अराफात अली कौन है और उस पर क्या आरोप थे?

अराफात अली शिवमोगा का रहने वाला है और वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS का सक्रिय सदस्य था। उस पर भारत में हिंसक विचारधारा फैलाने और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप था। NIA के मुताबिक, उसने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आतंकी फंड प्राप्त किया और भड़काऊ graffiti लिखवाने में मुख्य भूमिका निभाई। इस साजिश में आगजनी और तिरंगा जलाने जैसी हिंसक गतिविधियों की योजना भी शामिल थी।

उसे कैसे पकड़ा गया और पहले किसे सजा मिली?

अराफात अली गिरफ्तारी से बचने के लिए जनवरी 2020 में देश छोड़कर भाग गया था। उसे सितंबर 2023 में दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। इससे पहले नवंबर 2025 में इस मामले के दो अन्य आरोपियों, ज़बीउल्ला और नदीम फैज़ल को भी 6 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई जा चुकी है।

इस केस में और कितने लोग शामिल हैं?

NIA ने इस पूरे मामले में कुल 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें मोहम्मद शारिक, माज़ मुनीर अहमद और अन्य लोग शामिल हैं। इस साजिश में विदेश में बैठे एक ISIS हैंडलर की मदद ली गई थी जो क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पैसा भेजता था। आरोपियों पर UAPA और IPC की विभिन्न धाराओं के साथ कर्नाटक संपत्ति विनाश रोकथाम अधिनियम के तहत केस चलाया गया।