अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना रुख अचानक बदल दिया है। 36 घंटे पहले तक ईरान को पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी देने वाले ट्रंप अब बातचीत की मेज पर आने की बात कर रहे हैं। विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इसके पीछे आर्थिक तंगी, सहयोगियों की कमी और वैश्विक बाजार में चिप सप्लाई का रुकना जैसे गंभीर कारण हैं। अमेरिका में होने वाले आगामी चुनावों का दबाव भी इस फैसले की एक मुख्य वजह माना जा रहा है।

सैनिक खर्च और वैश्विक सहयोग की भारी कमी

अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के साथ युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की थी, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस में इसका विरोध हो रहा है। युद्ध के शुरुआती 6 दिनों में ही करीब 11 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अकेला छोड़ दिया गया है। नाटो के 32 सदस्य देशों में से केवल 6 देशों ने ही अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे बड़े देशों ने इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रंप की रणनीति कमजोर पड़ गई है।

ऊर्जा संकट और चिप उत्पादन पर गहरा असर

ईरान के साथ इस तनाव की वजह से फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में करीब 40% ऊर्जा बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, इससे दुनिया भर में हर दिन 1.1 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई कम हो गई है। इस संकट का सबसे बड़ा असर ताइवान की चिप निर्माता कंपनी TSMC पर पड़ा है, जो दुनिया के 90% एडवांस चिप बनाती है। ताइवान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है और वहां अब केवल 11 दिनों का गैस भंडार बचा है। अगर चिप उत्पादन रुकता है, तो Apple और Nvidia जैसी बड़ी कंपनियों को भारी नुकसान होगा।

परमाणु ठिकानों पर हमला और घरेलू राजनीति

ईरान ने हाल ही में इजरायल के डिमोना और अराद जैसे परमाणु अनुसंधान केंद्रों के पास मिसाइल हमले किए, जिन्हें रोकने में इजरायली डिफेंस नाकाम रहा। इन हमलों ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। दूसरी ओर, अमेरिका में नवंबर 2026 में होने वाले मिडटर्म चुनाव ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती हैं। युद्ध के कारण ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 40.4% तक पहुंच गई है और महंगाई भी रिकॉर्ड स्तर पर है। जनता के बीच युद्ध को लेकर बढ़ते असंतोष को देखते हुए ट्रंप अब शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.