मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्तों पर एक बार फिर तनाव बहुत बढ़ गया है। 11 और 12 मार्च 2026 को Strait of Hormuz और ओमान के पास कम से कम 6 व्यापारिक जहाजों पर बड़े हमले हुए हैं। इन हमलों में समुद्री ड्रोन और बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल किया गया है। जवाब में अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान के करीब 28 जहाजों को तबाह कर दिया है जो समुद्र में माइन्स बिछा रहे थे। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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किन जहाजों को बनाया गया निशाना और क्या हुआ नुकसान?

इन हमलों में अलग-अलग देशों के व्यापारिक जहाजों को चोट पहुंची है। दुबई और ओमान के पास हुए इन हमलों की वजह से समुद्री यातायात में डर का माहौल है। नीचे दी गई टेबल में आप प्रभावित जहाजों की जानकारी देख सकते हैं:

जहाज का नाम देश/मालिक घटना की जानकारी
Mayuree Naree Thailand ओमान के पास हमला हुआ और इंजन रूम में आग लग गई
ONE Majesty Japan Ras Al Khaimah के पास हमला हुआ, जहाज में छेद हुआ
Express Room Liberia ईरानी IRGC द्वारा हमला, चेतावनी अनदेखा करने का आरोप
Star Gwyneth Marshall Islands दुबई के पास हमले में जहाज के निचले हिस्से को नुकसान
Two Tankers Iraqi Waters बसरा के पास दो तेल टैंकरों में आग लगी, एक की मौत

US सेना की कार्रवाई और ईरान की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति और CENTCOM ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अगर समुद्र से माइन्स नहीं हटाई गईं तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक ईरान के अंदर 5,500 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने दुनिया को चेतावनी दी है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ईरान ने यह भी नियम बना दिया है कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को उनसे इजाजत लेनी होगी।

आम आदमी और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार करने वालों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि समुद्री रास्ते बंद होने या असुरक्षित होने से सामान की सप्लाई पर असर पड़ता है। UKMTO ने सभी जहाजों को सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करने को कहा है। इराक ने अपने बसरा पोर्ट से तेल की सप्लाई फिलहाल रोक दी है। समुद्री मामलों के जानकारों का कहना है कि अब जहाजों का इंश्योरेंस मिलना भी मुश्किल हो गया है। अगर तनाव और बढ़ता है तो खाड़ी देशों में रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।