सोशल मीडिया पर किसी को गाली देना या अपमान करना अब बहुत महंगा पड़ सकता है। प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने GCC देशों के नेताओं से मांग की है कि सोशल मीडिया पर दूसरों का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त आपराधिक कानून लागू किए जाएं। उनका कहना है कि यह कदम हर उम्र के नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है।
सऊदी अरब में सख्त सजा का प्रावधान
सऊदी अरब में पहले से ही एंटी-साइबरक्राइम कानून लागू है। इस कानून के तहत सोशल मीडिया या इंटरनेट पर मानहानि या अपमानजनक बातें फैलाने वालों को पांच साल तक की जेल और 30 लाख रियाल तक का जुर्माना हो सकता है। यह नियम उन बातों पर भी लागू होता है जो सार्वजनिक व्यवस्था, धार्मिक मूल्यों या नैतिकता के खिलाफ हों। सऊदी अरब का कानून मित्र देशों, उनके नेताओं या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने को भी अपराध मानता है।
UAE में भारी जुर्माने का नियम
UAE में फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 34 (2021) के जरिए अफवाहों और साइबर अपराधों पर लगाम कसी गई है। यहाँ किसी तीसरे व्यक्ति का अपमान करने पर जेल की सजा के साथ 2.5 लाख से 5 लाख दिरहम तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसके अलावा, विदेशी देशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वालों को छह महीने की जेल या 1 लाख से 5 लाख दिरहम तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।
कानूनों की सख्ती और हालिया कार्रवाई
इन नियमों को बहुत सख्ती से लागू किया जा रहा है। जून 2026 में सऊदी अरब की मीडिया रेगुलेशन अथॉरिटी ने एक नागरिक को पब्लिक प्रोसिक्यूशन के हवाले किया क्योंकि उसने एक मित्र देश का अपमान किया था। मीडिया मंत्री सलमान अल-दोसारी ने साफ कहा कि मित्र देशों के नेताओं पर हमला करना एक रेड लाइन है और ऐसी हरकतों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
प्रवासियों के लिए जरूरी सावधानी
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों को इन नियमों का खास ख्याल रखना चाहिए। सोशल मीडिया पर की गई एक छोटी सी टिप्पणी या किसी के खिलाफ अपमानजनक बात उन्हें बड़ी कानूनी मुश्किल में डाल सकती है। पब्लिक प्रोसिक्यूशन ऑफिस और मीडिया रेगुलेशन जैसी संस्थाएं ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती हैं, जिससे प्रवासियों की नौकरी और वीज़ा पर भी असर पड़ सकता है।