अमेरिकी दबाव में नही झुका सऊदी अरब.

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी प्रभाव के अंतर्गत कई अरब देशों ने इजरायल के साथ हाथ मिलाया और दोस्ताना रिश्तो को बहाल करने के लिए कदम भी आगे किया जिसमें संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देश शामिल हैं.

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बड़ा अरब समुदाय करता हैं विरोध.

एक बड़ा समुदाय फलस्तीन को लेकर इस चीजों का हमेशा से विरोध करते रहा है उनका मानना है कि अरब देशों को इजरायल के साथ नहीं जाना चाहिए था और उन्हें फलस्तीन के हितों की रक्षा करनी चाहिए थी.

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1967 तक वाली स्थिति लाए नही तो कोई बात नही.

सऊदी अरब के ऊपर भी डोनल ट्रंप प्रशासन ने दबाव डाला लेकिन सऊदी अरब इस दबाव में कभी भी न झुकाना हिला उसने कहा कि इजराइल के साथ बातें तभी आगे बढ़ सकती हैं जब वह फलस्तीन को 1967 के अनुसार सीमा वापस सौंप दें.

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स्थितियाँ ठीक नही हैं.

फलस्तीन के ऊपर इजराइल के तरफ से लगातार विषम को खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है और उसके लिए जो चीजें हो रही है वह पूरी दुनिया में सामने दिख रही हैं.

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Emergency बैठक के लिए KSA का कॉल.

इजरायल और फलस्तीन मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की आपातकालीन बैठक के लिए सऊदी अरब ने कॉल लिया है और विदेश मंत्री ने कहा है कि इस मुद्दे पर तुरंत आपातकालीन बैठक में वह सारे देश शामिल हो जो संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता रखते हैं.