फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनो ने रचा इतिहास, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से बाहर निकलकर किया स्पेसवॉक

अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में फ्रांस और यूरोप ने एक नया और बड़ा मुकाम हासिल किया है। फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनो ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी आईएसएस से बाहर निकलकर अंतरिक्ष में चहलकदमी यानी स्पेसवॉक किया है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ ही वह स्पेसवॉक करने वाली पहली फ्रांसीसी महिला बन गई हैं। इस दौरान उनके साथ अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन भी मौजूद रहे और दोनों ने मिलकर अंतरिक्ष में तय किए गए अहम पड़ाव को पूरा किया।
ढाई घंटे चला यह अहम मिशन
यह पूरा अंतरिक्ष मिशन करीब साढ़े छह घंटे तक लंबा चला। इस दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्रियों का मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहरी हिस्से में लगे एक बहुत जरूरी एंटीना को बदलना था। यह एंटीना अंतरिक्ष स्टेशन और अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में स्थित मिशन कंट्रोल रूम के बीच आपसी संपर्क बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। इस एंटीना के बदल जाने से अब अंतरिक्ष स्टेशन का संदेश भेजने और पाने का काम और अधिक बेहतर तरीके से हो पाएगा।
पृथ्वी की सतह से लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे इस स्टेशन से जैसे ही 44 वर्ष की सोफी एडेनो बाहर निकलीं, उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह अब अंतरिक्ष में बाहर आ चुकी हैं। उनके इस कदम के साथ ही फ्रांस के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नया पन्ना जुड़ गया है। फ्रांस के लोगों के लिए यह गर्व का पल है क्योंकि इससे पहले उनके देश की किसी भी महिला ने यह कारनामा कभी नहीं किया था।
दूसरी यूरोपीय महिला बनीं सोफी
फ्रांस की पहली महिला होने के साथ-साथ सोफी एडेनो ने पूरे यूरोप महाद्वीप का भी नाम रोशन किया है। वह स्पेसवॉक करने वाली यूरोप की मात्र दूसरी महिला अंतरिक्ष यात्री बन गई हैं। उनसे पहले यह खास उपलब्धि केवल इटली की अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्टोफोरेटी के नाम थी, जिन्होंने साल 2022 में यह कमाल करके दिखाया था। अब इस कड़ी में सोफी का नाम भी जुड़ गया है जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में महिलाओं के बढ़ते कदमों और उनकी मजबूत भागीदारी को साफ तौर पर सामने लाता है।
सोफी एडेनो की यह सफलता केवल एक देश की जीत नहीं है बल्कि पूरे यूरोपीय देशों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अंतरिक्ष जैसे कठिन और जोखिम भरे क्षेत्र में महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं और अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान संगठनों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के अभियानों से विज्ञान को और नई दिशा मिलेगी और दुनियाभर के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ने की प्रेरणा मिलती रहेगी।