दक्षिण चीन सागर विवाद: ताइवान ने स्कारबोरो शोल पर फिर ठोका अपना दावा, पड़ोसी देशों के बीच बढ़ी तनातनी

Aanya5 August 20262 min read48 viewsWorld
दक्षिण चीन सागर विवाद: ताइवान ने स्कारबोरो शोल पर फिर ठोका अपना दावा, पड़ोसी देशों के बीच बढ़ी तनातनी

दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल को लेकर छिड़ा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। ताइवान ने रविवार को इस महत्वपूर्ण क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का दावा दोहराया है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब फिलीपींस ने हाल ही में स्कारबोरो शोल से जुड़ा अपना आधिकारिक समुद्री नक्शा संयुक्त राष्ट्र (UN) में जमा किया है। इस समुद्री इलाके पर नियंत्रण को लेकर फिलीपींस, चीन और ताइवान के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है।

विवाद की जड़ और दावेदार

स्कारबोरो शोल रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण इलाका माना जाता है। इस क्षेत्र पर दावा करने वाले तीनों देशों ने इसे अलग-अलग नाम दिए हैं। फिलीपींस इसे बाजो दे मासिनलोक, ताइवान इसे डेमोक्रेसी रीफ और चीन इसे हुआंगयान दाओ के नाम से पुकारते हैं। फिलीपींस का कहना है कि उसने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के नियमों के तहत अपना आधिकारिक नौवहन चार्ट जमा किया है ताकि वह अपने समुद्री अधिकारों और क्षेत्रीय दावों को कानूनी रूप से मजबूत कर सके।

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ताइवान और चीन का रुख

ताइवान के विदेश मंत्रालय यानी MOFA ने स्पष्ट किया कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े सभी क्षेत्रीय विवादों का निपटारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री नियमों के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए होना चाहिए। ताइवान ने इस बात पर भी जोर दिया कि उसे भी इन बहुपक्षीय विवाद निपटान प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए। वहीं, दूसरी ओर चीन का रुख काफी सख्त बना हुआ है। चीन के विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस के इस कदम को पूरी तरह अवैध और निरर्थक बताया है। चीन का तर्क है कि हुआंगयान दाओ उसका अभिन्न हिस्सा है और उस पर उसकी संप्रभुता निर्विवाद है। बीजिंग ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय संधियों के मुताबिक यह क्षेत्र कभी भी फिलीपींस का हिस्सा नहीं रहा है और उनका वर्तमान दावा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप नहीं है।

शांतिपूर्ण समाधान की मांग

क्षेत्र में लगातार बढ़ती हलचल के बीच ताइवान लगातार इस बात की वकालत कर रहा है कि देशों को आपस में संवाद करना चाहिए। ताइवान का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को आधार बनाकर ही इस उलझन को सुलझाया जा सकता है। वर्तमान में यह विवाद न केवल इन तीन देशों के बीच एक बड़ी चुनौती बन गया है, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें इस समुद्री मार्ग पर टिकी हैं क्योंकि यह व्यापार और सुरक्षा के नजरिए से बहुत अहम है। फिलहाल इस विषय पर अधिक जानकारी आप GulfHindi.com पर पढ़ सकते हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर अपडेट्स दिए जाते हैं।

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