दक्षिण कोरिया ने आर्कटिक रूट से यूरोप के लिए शुरू किया ऐतिहासिक सफर, बदला रास्ता.

दक्षिण कोरिया के एक मालवाहक जहाज PanStar Acro ने इतिहास रचते हुए यूरोप के लिए अपनी पहली कमर्शियल यात्रा शुरू कर दी है। यह ऐतिहासिक सफर 22 अगस्त 2026 को दक्षिण कोरिया के Busan New Port से रात लगभग 9:30 बजे स्थानीय समयानुसार रवाना हुआ। इस पोलर नेविगेशन के लिए खास तौर पर तैयार किए गए 2,758 TEU क्षमता वाले इस जहाज पर कुल 837 TEU सामान लदा हुआ है, जिसमें ऑटोमोबाइल पार्ट्स, केमिकल प्रोडक्ट्स और 100 खाली कंटेनर शामिल हैं।
वैश्विक शिपिंग सेक्टर में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है जिसका मुख्य कारण अमेरिका और इस्राइल का ईरान के साथ चल रहा युद्ध है। इस संघर्ष की वजह से फरवरी 2026 से होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz व्यावहारिक रूप से बंद पड़ा है, जिससे जहाजों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या से निपटने और नए विकल्पों की तलाश करने के लिए इस वैकल्पिक आर्कटिक रूट को आजमाया जा रहा है, जिसमें लगभग 40 से 45 दिन लगने की उम्मीद है।
रूट की खासियत और समय की बचत
पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाले स्वेज नहर मार्ग की तुलना में यह आर्कटिक रूट लगभग 7,000 किलोमीटर छोटा है। इस नए रास्ते के इस्तेमाल से यात्रा के समय में करीब 35 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है और ईंधन की खपत भी काफी कम होगी। पैनस्टार के अधिकारियों के अनुसार सितंबर का महीना समुद्री बर्फ के पिघलने की वजह से नेविगेशन के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। दक्षिण कोरिया के महासागर उप मंत्री Nam Jae-hon ने जानकारी दी कि वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच इस मार्ग को एक रणनीतिक विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह कदम राष्ट्रपति Lee Jae Myung के उस लक्ष्य का हिस्सा है जिसके तहत वर्ष 2030 तक आर्कटिक को नियमित व्यापारिक मार्ग के रूप में स्थापित करना और बुसान को एक वैश्विक समुद्री केंद्र बनाना है।
सहयोग और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं
इस बड़ी परियोजना में Korea Ocean Business Corporation और Korea Shipping Association का पूरा सहयोग शामिल है। दक्षिण कोरिया के महासागर मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संबंधित एजेंसियों के साथ सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। हालांकि, इस मार्ग पर चलने के लिए रूस के साथ नेविगेशन और आइसब्रेकर सेवाओं में सहयोग लेना जरूरी है, जिस वजह से पश्चिमी देशों के सहयोगियों ने इसकी आलोचना की है। यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ा है, इसलिए पश्चिमी देशों को इस पर आपत्ति है। इसके अलावा, पर्यावरण संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बढ़ने से बर्फ तेजी से पिघल सकती है। यही वजह है कि पहले CMA CGM, MSC और Hapag-Lloyd जैसे बड़े शिपिंग कैरियर इस इलाके से दूर रहे हैं।
साउथ कोरिया का यह जहाज अपनी यात्रा के दौरान ब्रिटेन के Felixstowe, नीदरलैंड्स के Rotterdam और पोलैंड के Gdansk बंदरगाहों पर रुकेगा। इससे पहले चीन ने भी अगस्त 2026 की शुरुआत में Dubai Tower जहाज के जरिए उत्तरी समुद्री मार्ग पर अपनी नियमित सेवाएं शुरू की थीं। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों को उम्मीद है कि यह परीक्षण सफल रहेगा और आने वाले समय में वैश्विक व्यापार के लिए एक नया और तेज रास्ता खुल जाएगा।