हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव के बीच दक्षिण कोरिया ने अपनी तेल और गैस सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए बड़ी तैयारी कर ली है। राष्ट्रपति के विशेष दूत कांग हून-सिक कजाकिस्तान, ओमान और सऊदी अरब के दौरे पर निकल गए हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में कच्चे तेल और अन्य जरूरी सामान की कमी न हो। दक्षिण कोरिया का आधा से ज्यादा तेल आयात इसी विवादित समुद्री रास्ते से आता है, इसलिए सरकार अब वैकल्पिक सप्लाई लाइनों पर जोर दे रही है।

तेल की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए सरकार का क्या है नया प्लान?

सरकार ने समुद्री संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्ते खोजने और लंबी अवधि के लिए तेल सुरक्षित करने पर काम शुरू कर दिया है। कांग हून-सिक अपनी यात्रा के दौरान ऊर्जा कंपनियों और वहां की सरकारों से बात करेंगे ताकि कच्चा तेल बिना किसी रुकावट के कोरिया पहुंच सके। वर्तमान में दक्षिण कोरिया अपनी तेल जरूरत का करीब 61% और नेफ्था का 54% हिस्सा हॉर्मुज़ रूट से मंगवाता है। किसी भी बाधा से बचने के लिए अब सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है ताकि हॉर्मुज़ के रास्ते को बाइपास किया जा सके।

सरकार ने अब तक तेल के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं?

दक्षिण कोरियाई सरकार ने पहले ही कई देशों से बड़ी मात्रा में तेल का इंतजाम कर लिया है ताकि कम समय में होने वाली किसी भी कमी को रोका जा सके। इसमें यूएई और अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण देश शामिल हैं। मुख्य सरकारी आंकड़ों और योजनाओं का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

प्रमुख जानकारी विवरण
वैकल्पिक तेल स्टॉक 110 मिलियन बैरल (अप्रैल और मई के लिए)
सहयोगी देशों की संख्या सऊदी और अमेरिका सहित 17 देश
यूएई से प्राप्त सप्लाई 24 मिलियन बैरल तेल आना शुरू हुआ
भेजे जाने वाले जहाज़ 5 कोरियाई जहाज़ सऊदी के यनबू पोर्ट भेजे जाएंगे
मुख्य दूत का दौरा कजाकिस्तान, ओमान और सऊदी अरब की यात्रा

आम जनता और प्रवासियों के लिए क्या संदेश है?

वित्त मंत्री कू युन-चेओल ने खाड़ी देशों के दूतों से मुलाकात कर तेल और गैस की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि वे पेट्रोलियम उत्पादों और दवाओं जैसी जरूरी चीजों की कीमतों को काबू में रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। राष्ट्रपति ली जे मायुंग ने अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण स्थिति में बताते हुए लोगों से ऊर्जा बचाने की अपील की है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की शिपिंग कंपनियों के लिए यह सुरक्षा व्यवस्था काफी अहम है क्योंकि इससे समुद्री व्यापारिक रास्तों पर जहाजों की सुरक्षा बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.