SpaceX रॉकेट का मलबा चांद से टकराया, 8,690 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हुआ धमाका

अंतरिक्ष की दुनिया में पिछले 19 महीनों से भटक रहा एलन मस्क की कंपनी SpaceX का फाल्कन-9 रॉकेट का एक हिस्सा आखिरकार चंद्रमा की सतह से जा टकराया। यह घटना बुधवार की बताई जा रही है, जब यह भारी-भरकम मलबा करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से चांद के पश्चिमी हिस्से में स्थित आइंस्टीन क्रेटर के पास गिरा। इस टक्कर से चांद की सतह पर एक नया गड्ढा बनने की पूरी संभावना जताई गई है।
क्या पृथ्वी को है कोई खतरा
इस हादसे के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इससे पृथ्वी या वहां रहने वाले लोगों को कोई खतरा है। हालांकि, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने इस मामले पर स्थिति साफ कर दी है। नासा के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि चंद्रमा पर हुई इस टक्कर से पृथ्वी को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। यह घटना पूरी तरह से अंतरिक्ष के एक सीमित दायरे में हुई है।
कैसे हुआ यह हादसा
जानकारी के मुताबिक, यह रॉकेट का हिस्सा एक स्कूल बस के आकार का है और इसका वजन करीब 4,000 टन बताया जा रहा है। यह फाल्कन-9 रॉकेट मूल रूप से जनवरी 2025 में दो चंद्र लैंडर लेकर अंतरिक्ष में भेजा गया था। रॉकेट का निचला हिस्सा तो वापस पृथ्वी पर आ गया था, लेकिन उसका ऊपरी हिस्सा अपनी दिशा से भटक गया और पिछले काफी समय से अंतरिक्ष में घूम रहा था। यह हिस्सा चांद के जिस हिस्से पर टकराया है, वह पृथ्वी से सीधे तौर पर दिखाई नहीं देता है, जिस कारण इसकी सीधी तस्वीरें लेना मुमकिन नहीं हो पाया।
अंतरिक्ष में कचरे का बढ़ता जाल
स्पेसएक्स ने आधिकारिक तौर पर इसे एक अनपेक्षित घटना माना है। अंतरिक्ष के जानकारों का कहना है कि साल 1959 से लेकर अब तक दर्जनों अंतरिक्ष यान या उनके हिस्से किसी न किसी तरह पृथ्वी या चांद की सतह से टकरा चुके हैं। हालांकि, जिस रफ्तार से यह मलबा चांद से टकराया, उसने एक बार फिर अंतरिक्ष में मौजूद मलबे और कचरे को लेकर बहस छेड़ दी है। फाल्कन-9 का यह हिस्सा लंबे समय तक अनियंत्रित रहने के कारण अंतरिक्ष में भटकता रहा और अंततः इसका सफर चांद की जमीन पर समाप्त हुआ। वर्तमान में किसी भी यान के वहां मौजूद न होने के कारण वैज्ञानिक केवल अनुमानित डेटा के आधार पर इस टक्कर का विश्लेषण कर रहे हैं।