Spain का बड़ा फैसला, इसराइल के साथ EU का समझौता खत्म करने की मांग, PM सान्चेज़ ने दिया बयान
स्पेन के प्रधानमंत्री Pedro Sanchez ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कहा है कि स्पेन यूरोपीय संघ (EU) से इसराइल के साथ हुए एसोसिएशन एग्रीमेंट को खत्म करने की मांग करेगा। प्रधानमंत्री सान्चेज़ का मानना है कि जो सरकार अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है, वह यूरोपीय संघ की पार्टनर नहीं रह सकती।
स्पेन ने यह कदम क्यों उठाया और आगे क्या होगा?
प्रधानमंत्री Pedro Sanchez ने अंडालुसिया में एक रैली के दौरान बताया कि स्पेन औपचारिक तौर पर EU से इसराइल के साथ समझौता खत्म करने को कहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम इसराइल के लोगों के खिलाफ नहीं, बल्कि वहां की सरकार की हरकतों के खिलाफ है। स्पेन ने इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को भी एक बड़ी गलती बताया है। स्पेन इस प्रस्ताव को 22 अप्रैल 2026 को लक्समबर्ग में होने वाली EU विदेश मंत्रियों की बैठक में पेश करेगा।
इस समझौते के टूटने की प्रक्रिया और अन्य देशों का क्या कहना है?
यह समझौता साल 2000 से लागू है और इसी के तहत EU और इसराइल के बीच व्यापार होता है। इस समझौते के अनुच्छेद 2 में मानवाधिकारों के सम्मान की बात कही गई है। अगर इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 60 के तहत इस समझौते को खत्म या निलंबित किया जा सकता है। हालांकि, इसे पूरी तरह बंद करने के लिए यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होगी। इस मुहिम में स्लोवेनिया और आयरलैंड ने भी स्पेन का साथ दिया है और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य तारीखें और महत्वपूर्ण जानकारी
| तारीख/विवरण | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 17 अप्रैल 2026 | स्पेन, स्लोवेनिया और आयरलैंड ने Kaja Kallas को संयुक्त पत्र भेजा |
| 18 अप्रैल 2026 | स्पेन ने EU काउंसिल से इस मुद्दे पर बहस और वोटिंग की मांग की |
| 19 अप्रैल 2026 | PM Pedro Sanchez ने सार्वजनिक रूप से समझौता खत्म करने का ऐलान किया |
| 22 अप्रैल 2026 | लक्समबर्ग में विदेश मंत्रियों की बैठक में औपचारिक प्रस्ताव दिया जाएगा |
| मई-जून 2025 | EU ने मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच शुरू की थी |
| वर्ष 2000 | EU और इसराइल के बीच एसोसिएशन एग्रीमेंट लागू हुआ था |
| इज़राइली प्रतिक्रिया | PM नेतन्याहू ने इसे राजनयिक युद्ध और पक्षपात बताया है |