ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने बताया कि इस युद्ध की वजह से उनके देश में ईंधन खरीदने का खर्च करीब 24 अरब यूरो बढ़ गया है। सांचेज ने इस युद्ध को एक आपदा बताया और कहा कि इसका खामियाजा दुनिया भर के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ईरान युद्ध से स्पेन और यूरोप पर क्या असर पड़ा
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध के बाद से ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इसराइल की एकतरफा कार्रवाई की वजह से स्पेन की कंपनियों को एक महीने से कम समय में 100 अरब यूरो का नुकसान हुआ है। केवल स्पेन ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ (EU) का ईंधन बिल भी 22 अरब यूरो से ज्यादा बढ़ गया है।
| विवरण | आंकड़ा/प्रभाव |
|---|---|
| स्पेन का ईंधन खर्च वृद्धि | 24 अरब यूरो |
| यूरोपीय संघ का ईंधन खर्च वृद्धि | 22 अरब यूरो |
| स्पेन की कंपनियों का कुल नुकसान | 100 अरब यूरो |
| ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी | 50% |
| खाद (Fertilizer) की कीमतों में बढ़ोतरी | 40% |
| स्पेन का सहायता पैकेज | 5 अरब यूरो |
| बिजली VAT में कटौती | 21% से घटाकर 10% |
आम जनता को राहत देने के लिए स्पेन सरकार ने क्या किया
महंगाई से लड़ने के लिए स्पेन सरकार ने 5 अरब यूरो का इमरजेंसी पैकेज जारी किया है। इसके तहत बिजली और ईंधन पर लगने वाले वैट (VAT) को 21% से घटाकर 10% कर दिया गया है ताकि आम आदमी की जेब पर बोझ कम हो। इसके अलावा, सरकार ने घरों के किराए पर भी रोक लगाई है ताकि लोग इस आर्थिक संकट का सामना कर सकें।
भविष्य के लिए स्पेन की ऊर्जा रणनीति
पीएम सांचेज ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) को छोड़कर क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़े। उन्होंने बताया कि स्पेन ने रिन्यूएबल एनर्जी में काफी निवेश किया है, जिसकी वजह से वहां बिजली की कीमतें कई अन्य यूरोपीय देशों के मुकाबले कम रही हैं। स्पेन का लक्ष्य अब यूरोप के साथ मिलकर एक एनर्जी यूनियन बनाना है ताकि भविष्य में किसी युद्ध की वजह से ईंधन की कमी न हो।