स्पेन, स्लोवेनिया और आयरलैंड ने यूरोपीय संघ (EU) से इसराइल के साथ अपने पुराने समझौते को रोकने की मांग की है। इन देशों का कहना है कि गाजा, वेस्ट बैंक और लेबनान में हालात बहुत खराब हो रहे हैं और यूरोपीय संघ अब सिर्फ तमाशा नहीं देख सकता। इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए आज लक्ज़मबर्ग में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक हो रही है।

समझौता खत्म करने की मांग क्यों हो रही है?

यूरोपीय संघ और इसराइल के बीच साल 2000 में एक समझौता हुआ था। इस संधि की दूसरी धारा (Article 2) में यह साफ लिखा था कि दोनों पक्षों को मानवाधिकारों का सम्मान करना होगा। स्पेन और आयरलैंड का कहना है कि इसराइल ने इन बुनियादी नियमों का उल्लंघन किया है। हाल ही में फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा वाले कानून और नई बस्तियों को मंजूरी देने जैसे कदमों ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है। UN के विशेषज्ञों ने भी कहा है कि मानवाधिकारों के उल्लंघन की वजह से इस समझौते को बहुत पहले ही रोका जाना चाहिए था।

अलग-अलग देशों और नेताओं की क्या राय है?

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इसराइल अंतरराष्ट्रीय कानून को नहीं मान रहा है, इसलिए वह यूरोपीय संघ का पार्टनर नहीं रह सकता। आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलन मैकेंटी ने भी कहा कि जिस देश में मानवाधिकारों का इतना उल्लंघन हो रहा हो, उसके साथ व्यापारिक लाभ वाला समझौता नहीं चलना चाहिए। दूसरी तरफ, जर्मनी ने इस समझौते को रोकने की मांग का विरोध किया है। इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इन दावों को गलत बताते हुए इसे पाखंड करार दिया है।

इस पूरे मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे टेबल में दी गई हैं:

पक्ष/संस्था क्या स्टैंड लिया या क्या कहा
स्पेन, आयरलैंड और स्लोवेनिया इसराइल के साथ समझौते को रोकने की मांग की
यूरोपीय संघ (EU) आज लक्ज़मबर्ग में इस पर चर्चा कर रहा है
जर्मनी समझौता रोकने की मांग को खारिज किया
UN एक्सपर्ट्स तुरंत समझौते को निलंबित करने की सलाह दी
पेड्रो सांचेज (स्पेन) कहा कि इसराइल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहा है
हेलन मैकेंटी (आयरलैंड) मौत की सजा वाले कानून को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया
गिदोन सार (इसराइल) इन मांगों को पाखंड बताया और खारिज किया
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.