श्रीलंकाई सरकार ने देश की तटस्थता बनाए रखने के लिए अमेरिका के एक अहम सैन्य अनुरोध को ठुकरा दिया है। राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake ने खुद संसद में इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने दो अमेरिकी युद्धक विमानों को मत्तला एयरपोर्ट पर लैंड करने की अनुमति नहीं दी। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ते तनाव और खास तौर पर मिडिल ईस्ट के संघर्षों को देखते हुए लिया गया है ताकि श्रीलंका किसी भी गुटबाज़ी का हिस्सा न बने।

अमेरिका का क्या था अनुरोध और श्रीलंका ने क्यों किया इनकार?

अमेरिकी सरकार ने फरवरी 2026 में श्रीलंका से मत्तला राजपक्षे इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Mattala Rajapaksa International Airport) पर अपने दो लड़ाकू विमानों को उतारने की अनुमति मांगी थी। ये विमान 4 और 8 मार्च को लैंड करने वाले थे। राष्ट्रपति दिसानायके के अनुसार, इन विमानों में आठ एंटी-शिप मिसाइलें (anti-ship missiles) लगी हुई थीं और वे जिबूती (Djibouti) बेस से आ रहे थे। श्रीलंका ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी देश की सैन्य गतिविधियों के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगे।

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच श्रीलंका की निष्पक्ष नीति

श्रीलंका ने केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि ईरान के अनुरोध को भी ठुकराया है। ईरान ने मार्च के दूसरे हफ्ते में अपने तीन युद्धपोतों को श्रीलंका भेजने की बात कही थी जिसे सरकार ने मना कर दिया। राष्ट्रपति ने ज़ोर दिया कि श्रीलंका मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहता है। समुद्री क्षेत्र में हालिया घटनाओं को देखते हुए श्रीलंका अपनी सुरक्षा और व्यापारिक हितों को बचाए रखने के लिए यह कड़ा रुख अपना रहा है।

विषय विवरण
विमानों की संख्या 2 अमेरिकी युद्धक विमान
एयरपोर्ट का नाम Mattala Rajapaksa International Airport
लैंडिंग की प्रस्तावित तारीख 4 और 8 मार्च 2026
इनकार का मुख्य कारण देश की तटस्थता (Neutrality) बनाए रखना
विमानों में लगे हथियार 8 एंटी-शिप मिसाइलें
ईरान का अनुरोध 3 युद्धपोतों की यात्रा (मना किया गया)
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.