पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच श्रीलंका को भारत की तरफ से बड़ी मदद मिली है। रविवार, 29 मार्च 2026 को कोलंबो में 38,000 मीट्रिक टन ईंधन की खेप पहुंच गई। श्रीलंका के राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake ने इस संकट के समय तुरंत सहायता भेजने के लिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi का शुक्रिया अदा किया है। यह मदद भारत की ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के तहत भेजी गई है।

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PM Modi और राष्ट्रपति के बीच फोन पर हुई थी चर्चा

इस ईंधन की खेप पहुंचने से कुछ दिन पहले दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। 24 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री Narendra Modi और श्रीलंका के राष्ट्रपति के बीच फोन पर चर्चा हुई, जिसमें पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता जताई गई।

  • दोनों नेताओं ने दुनिया भर में समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
  • भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी श्रीलंका के विदेश मंत्री से 23 मार्च को बात की थी।
  • राष्ट्रपति Dissanayake ने सोशल मीडिया पर भारत की ‘त्वरित सहायता’ और करीबी तालमेल की सराहना की।
  • भारत ने ‘Vision MAHASAGAR’ के तहत क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोग का वादा किया है।

संकट के समय भारत और श्रीलंका का सहयोग

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण श्रीलंका में ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने का डर था। ऐसे में भारत ने समय रहते मदद भेजकर सप्लाई चैन को बनाए रखने में योगदान दिया है। भारत और श्रीलंका के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।

तारीख महत्वपूर्ण अपडेट
23 मार्च 2026 विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई
24 मार्च 2026 PM Modi और राष्ट्रपति के बीच फोन कॉल
29 मार्च 2026 38,000 टन ईंधन कोलंबो बंदरगाह पहुंचा

यह सहायता श्रीलंका के आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई में अस्थिरता बनी हुई है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ हर मुश्किल घड़ी में खड़ा है।