श्रीलंका की जेलों में गहराया संकट, 11 हजार की क्षमता वाली जेलों में बंद हैं 41 हजार कैदी, सरकार ने दिए जांच के आदेश

Nura Basta8 August 20262 min read67 viewsWorld
श्रीलंका की जेलों में गहराया संकट, 11 हजार की क्षमता वाली जेलों में बंद हैं 41 हजार कैदी, सरकार ने दिए जांच के आदेश

श्रीलंका की जेलों में इस समय हालात बहुत खराब हो चुके हैं और जेलों में कैदियों की संख्या उनकी क्षमता से कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। 7 अगस्त 2026 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, श्रीलंका की जेलें जो मूल रूप से लगभग 11,000 कैदियों के लिए बनाई गई थीं, उनमें इस समय 41,000 से भी ज्यादा लोग बंद हैं। यह स्थिति जेल प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि जेलें अपनी तय क्षमता से करीब चार गुना अधिक कैदियों का भार उठा रही हैं।

जेलों में हो रही हिंसा और सरकार की सख्ती

जेलों के अंदर लगातार हो रही हिंसा और दंगों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। 6 और 7 अगस्त को कोलंबो मैगजीन जेल और कुरुविटा जेल में दो अलग-अलग झड़पें हुईं, जिनमें 3 कैदियों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इससे पहले 6 जुलाई को नेगोंबो जेल में हुई एक हिंसक झड़प में 26 लोगों की जान चली गई थी। पल्लांसेना सुधार केंद्र में भी कैदियों ने विरोध प्रदर्शन किया जिसे काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

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सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री Ananda Wijepala ने संसद को जानकारी देते हुए बताया कि इन घटनाओं के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। सरकार को संदेह है कि यह सब कुछ सोची-समझी साजिश का हिस्सा है जो नशीले पदार्थों के कारोबार और अंडरवर्ल्ड गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है। इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने जेल की सुरक्षा और कैदियों की स्थिति सुधारने के लिए जेल विभाग, श्रीलंका पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के बीच एक संयुक्त तंत्र बनाने का आदेश दिया है। जरूरत पड़ने पर इसमें सेना की भी मदद ली जाएगी।

बदले जाएंगे जेल के नियम और सुधारी जाएगी व्यवस्था

न्याय और राष्ट्रीय एकीकरण मंत्री Harshana Nanayakkara ने बताया कि जेलों में व्यवस्था ठीक करने के लिए करीब 70 नए कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। साथ ही फॉरेंसिक रिपोर्ट्स को जल्दी तैयार करने के लिए नई मशीनें भी सरकार ला रही है। सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि सरकार मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में जमानत नियमों में बदलाव लाने की योजना बना रही है। इससे उन कैदियों को बड़ी मदद मिलेगी जो लंबे समय से ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं और जिनकी संख्या कुल कैदियों का तीन-चौथाई हिस्सा है।

मानवाधिकार संगठनों जैसे कि Amnesty International और Human Rights Commission of Sri Lanka ने लगातार जेलों की दयनीय स्थिति पर सवाल उठाए हैं। इस समय जेल आयुक्त का पद भी एक कार्यवाहक अधिकारी संभाल रहे हैं, क्योंकि पुराने अधिकारी के खिलाफ अभी जांच चल रही है। श्रीलंका सरकार इन सुधारों के जरिए जेल के अंदर की सुरक्षा और वहां रह रहे हजारों लोगों की स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है।

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