श्रीलंका की जेलों में हुआ हिंसक बवाल, 3 कैदियों की मौत और 20 से ज्यादा लोग हुए घायल.

श्रीलंका की अलग-अलग जेलों में शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को हुई भारी हिंसा में 3 कैदियों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना कुुरुविटा जेल, पलानसेना ओपन-एयर जेल और कोलंबो की मैगजीन जेल में हुई। कैदियों ने जेल के अंदर ही हंगामा शुरू कर दिया था, जिसके बाद स्थिति को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। फिलहाल सभी जेलों में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है और अधिकारी पूरी निगरानी रख रहे हैं।
साजिश और ओवरक्राउडिंग का बड़ा मुद्दा
इस पूरे मामले पर सरकार ने अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी है। पब्लिक सिक्योरिटी मिनिस्टर Ananda Wijepala ने संसद को बताया कि यह केवल एक मामूली विवाद नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश नजर आ रही है। जांच में सामने आया है कि इस हिंसा के पीछे नशीले पदार्थों का कारोबार और अंडरवर्ल्ड के लोगों का हाथ हो सकता है। यह मामला काफी गंभीर है क्योंकि जेल के अंदर से इस तरह की साजिशों का सामने आना वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।
दूसरी ओर, न्याय मंत्री Harshana Nanayakkara ने जेलों में भीड़ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन जेलों की क्षमता केवल 10,000 कैदियों की है, लेकिन फिलहाल वहां 39,000 से ज्यादा लोग बंद हैं। कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली कमेटी के अध्यक्ष Senaka Perera ने बताया कि जमानत के कड़े नियमों की वजह से जेलों में कैदियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो भविष्य में और भी ज्यादा तनाव का कारण बन सकती है।
सरकार का बड़ा एक्शन प्लान
इस घटना से पहले 6 जुलाई 2026 को नेगोंबो जेल में भी ऐसी ही एक हिंसक घटना हुई थी, जिसमें कम से कम 26 लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हादसों को देखते हुए राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake ने अब कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। उन्होंने जेल विभाग, श्रीलंका पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स और सेना को मिलाकर एक जॉइंट मैकेनिज्म बनाने का आदेश दिया है। यह नई व्यवस्था अगले हफ्ते तक लागू हो जाएगी, जिसका काम जेल की सुरक्षा को पुख्ता करना और कैदियों की सुविधाओं पर ध्यान देना होगा ताकि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके।