श्रीलंका ने दो ईरानी युद्धपोतों के 200 से ज़्यादा क्रू मेंबर्स को सुरक्षित उनके देश वापस भेज दिया है. ये लोग अमेरिकी पनडुब्बी के हमले और जहाजों में तकनीकी खराबी के कारण श्रीलंका में फंसे हुए थे. मंगलवार रात एक स्पेशल फ्लाइट के ज़रिए इन्हें ईरान भेजा गया. इस पूरे काम में श्रीलंका ने मानवीय आधार पर मदद की है.
जहाजों के साथ क्या हुआ और कैसे मिली मदद
घटना की शुरुआत मार्च 2026 में हुई थी जब दो अलग-अलग ईरानी जहाजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. एक जहाज पर हमला हुआ था तो दूसरा तकनीकी खराबी की वजह से रुक गया था. श्रीलंका ने तुरंत बचाव अभियान चलाकर नाविकों को सुरक्षित निकाला.
| विवरण | IRIS Dena | IRIS Booshehr |
|---|---|---|
| घटना की तारीख | 4 मार्च, 2026 | 5 मार्च, 2026 |
| क्या हुआ | अमेरिकी पनडुब्बी (USS Charlotte) का हमला | जहाज में तकनीकी खराबी |
| बचाए गए लोग | 32 क्रू मेंबर्स | 208 क्रू मेंबर्स |
| स्थिति | भारत के नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था | श्रीलंका से मदद मांगी थी |
| अन्य जानकारी | 84 क्रू मेंबर्स की मौत हुई, शव भेजे गए | कुछ क्रू मेंबर्स अभी भी श्रीलंका में मौजूद हैं |
श्रीलंका सरकार ने क्या सफाई दी
श्रीलंका के उप रक्षा मंत्री Aruna Jayasekera ने बताया कि सभी क्रू मेंबर्स को मंगलवार रात 11 बजे विशेष उड़ान से भेजा गया. सरकार ने साफ किया कि श्रीलंका इस पूरे मामले में पूरी तरह तटस्थ रहा और किसी भी देश का पक्ष नहीं लिया. राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों और हेग कन्वेंशन का पालन किया है.
विदेश मंत्री विजिथा हेरथ और सुरक्षा मंत्री आनंद विजयपाल ने बताया कि नाविकों के इलाज और उन्हें वापस भेजने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया गया. श्रीलंका ने इस बात से भी इनकार किया कि अमेरिका ने क्रू मेंबर्स को भेजने के लिए उन पर कोई दबाव बनाया था. फिलहाल 8 से 15 ईरानी क्रू सदस्य अभी भी त्रिंकोमाली के तट पर मौजूद जहाज की सहायता के लिए श्रीलंका में ही रुके हुए हैं.
