श्रीलंका ने एक बड़े मानवीय कदम के तहत 238 ईरानी नाविकों को उनके देश वापस भेज दिया है. ये नाविक उस समय वहां फंस गए थे जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत पर हमला किया था. इस पूरी घटना ने मध्य पूर्व के तनाव को अब हिंद महासागर तक पहुंचा दिया है.

अमेरिकी पनडुब्बी हमले में क्या हुआ था

4 मार्च 2026 को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर टॉरपीडो से हमला किया. इस हमले में जहाज डूब गया और ईरानी अधिकारियों के मुताबिक 104 नाविकों की जान गई, जिनमें से 84 शव बरामद किए गए. अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी दुश्मन जहाज पर पहला ऐसा टॉरपीडो हमला था.

नाविकों की वापसी और श्रीलंका की भूमिका

कुल 238 नाविकों को 14 अप्रैल 2026 को चार्टर्ड विमान से ईरान भेजा गया. इनमें IRIS Dena से बचाए गए 32 नाविक और IRIS Bushehr के 206 नाविक शामिल थे. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसनायके ने बताया कि 1907 के हेग कन्वेंशन के तहत मानवीय आधार पर इन्हें सुरक्षा दी गई. श्रीलंका ने तटस्थता बनाए रखने के लिए अमेरिकी युद्धक विमानों को अपनी जमीनी सुविधाएं देने से साफ इनकार कर दिया है.

जहाजों और नाविकों की वर्तमान स्थिति

जहाज का नाम स्थिति मुख्य जानकारी
IRIS Dena डूब गया टॉरपीडो हमला, 104 मौतें, 32 नाविक बचाए गए
IRIS Bushehr श्रीलंका में आश्रय इंजन फेल होने के कारण प्रवेश, 206 नाविक वापस भेजे गए, 15 अभी वहां हैं
IRIS Lavan भारत (कोच्चि) में आश्रय 183 चालक दल सदस्य, जिनमें से 100 से अधिक वापस जा चुके हैं

डिप्टी रक्षा मंत्री Aruna Jayasekara के अनुसार, IRIS Bushehr के करीब 15 नाविक अभी भी श्रीलंका के Trincomalee के पास जहाज को संभालने के लिए वहां रुके हुए हैं. बाकी सभी नाविकों को सुरक्षित उनके देश भेज दिया गया है.