हॉर्मुज जलडमरूमध्य और अरब की खाड़ी में पिछले कई महीनों से करीब 1,500 से ज्यादा कमर्शियल जहाज फँसे हुए हैं। इन जहाजों के लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहने से समुद्री पर्यावरण के लिए एक बड़ी मुश्किल पैदा हो गई है। 28 फरवरी 2026 से अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग को बंद कर दिया गया था, जिसका असर अब दुनिया भर के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है।
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समुद्री जीवों का बढ़ा खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार लंबे समय तक पानी में खड़े रहने के कारण जहाजों के निचले हिस्से में काई, सीप, बैक्टीरिया और अन्य समुद्री जीव चिपक गए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के प्रोफेसर Mario Tamburri ने इसे परफेक्ट स्टॉर्म बताया है। जब ये जहाज दोबारा चलना शुरू करेंगे, तो ये हानिकारक जीव दुनिया भर के अन्य बंदरगाहों तक पहुँच जाएंगे, जिससे स्थानीय मछलियों और वहां के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
बंदरगाहों पर बढ़ सकता है असर
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत और सिंगापुर जैसे बंदरगाह इस खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि वहां का तापमान अरब की खाड़ी जैसा ही है। मौजूदा नियम इस तरह की बड़ी घटना के लिए पर्याप्त नहीं हैं। International Maritime Organization (IMO) ने फँसे हुए जहाजों के लिए कुछ गाइडलाइन्स दी थीं, लेकिन इस बार मामला बहुत बड़ा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि जहाजों को किसी भी बंदरगाह पर पहुँचने से पहले उनकी ठीक से सफाई करना बहुत जरूरी है ताकि बीमारियों और आक्रामक समुद्री जीवों के प्रसार को रोका जा सके।
