Strait of Hormuz में भारी तनाव की वजह से दुनिया भर के व्यापार और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। यहाँ लगभग 1,200 मालवाहक जहाज़ फंस गए थे, जिनमें करीब 125 अरब डॉलर का सामान लदा हुआ था। अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद इन जहाज़ों के निकलने का रास्ता धीरे-धीरे खुल रहा है।

ℹ: Bahrain: अमेरिका और GCC देशों की बड़ी बैठक शुरू, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान पहुंचे मनामा

कब और कैसे बंद हुआ रास्ता

यह समुद्री रास्ता 28 फरवरी 2026 से बंद होना शुरू हुआ था। 2 मार्च 2026 को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया था। यह फैसला अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद लिया गया था। 20 जून 2026 को ईरान ने इसे फिर से बंद करने की धमकी दी थी, लेकिन 23 और 24 जून को अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनी, जिससे जहाज़ों की आवाजाही फिर से शुरू हुई।

सरकारी बयान और नए नियम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 जून 2026 को पुष्टि की कि उन्होंने इस रास्ते को खुला रखने पर सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि 21 जून 2026 को इस रास्ते से 19 मिलियन बैरल तेल निकला, जो एक रिकॉर्ड है। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस ने बताया कि शांति समझौते के हिस्से के रूप में अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा ली है।

International Maritime Organization (IMO) ने एक नया नेविगेशन फ्रेमवर्क लागू किया है ताकि फंसे हुए जहाज़ सुरक्षित बाहर निकल सकें। इस संकट में करीब 11,000 नाविक फंस गए थे। अब जहाज़ों के लिए दो रास्ते तय किए गए हैं: एक उत्तर में ईरानी पानी के ज़रिए और दूसरा दक्षिण में ओमान और अमेरिका के तालमेल से।

मुख्य आंकड़ों पर एक नज़र

विवरण आंकड़े
कुल फंसे हुए जहाज़ 1,200
अटके हुए माल की कीमत 125 अरब डॉलर
फंसे हुए नाविकों की संख्या 11,000
21 जून को निकला तेल 19 मिलियन बैरल
डील के बाद निकले जहाज़ 172 से ज़्यादा

विशेषज्ञों की राय और आने वाले बदलाव

Allianz Commercial के कैप्टन राहुल खन्ना ने कहा कि इस घटना ने दुनिया को यह सिखाया है कि अब सिर्फ मुनाफे के बजाय सप्लाई चेन की मजबूती पर ध्यान देना ज़रूरी है। अब कंपनियां सामान पहुँचाने के पुराने तरीकों को बदलकर ज़्यादा सुरक्षित विकल्प तलाशेंगी।

ईरान ने यह भी ऐलान किया है कि वह इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों पर मैनेजमेंट फीस लगाएगा। इस फीस को लेकर 60 दिनों तक बातचीत होगी, जिसके बाद इसे लागू किया जाएगा। इसके अलावा, ईरान अब जहाज़ों के मालिक और सामान की मंज़िल की पूरी जानकारी IRGC को पहले से देने का सिस्टम बना रहा है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com