Strait of Hormuz में चल रहे तनाव की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा और सामान की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस सैन्य संकट के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यह रास्ता कल खुल भी जाता है, तो भी सप्लाई चेन में आई रुकावटों का असर बहुत लंबे समय तक बना रहेगा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है।
किन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
इस समुद्री रास्ते के बंद होने से केवल तेल ही नहीं, बल्कि कई अन्य जरूरी सामानों की कमी होने लगी है। ब्रिटेन जैसे देशों में हवाई जहाज के ईंधन और जरूरी दवाओं की कमी का खतरा बढ़ गया है। खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई रुकने की वजह से गाड़ियां बनाने वाली कंपनियों को भी बड़ा नुकसान हो रहा है।
| सेक्टर | मुख्य प्रभाव |
|---|---|
| ऊर्जा (Energy) | ईंधन की भारी कमी और कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी |
| ऑटोमोबाइल | एल्युमीनियम की कमी से Toyota और Nissan जैसी कंपनियों का उत्पादन घटा |
| खेती (Agriculture) | खाद और भोजन की कीमतों में दुनिया भर में तेजी आएगी |
| दवाइयां | ब्रिटेन में जीवन रक्षक दवाओं की कमी की आशंका जताई गई है |
मौजूदा स्थिति और बड़े देशों का क्या है रुख?
ईरान की Revolutionary Guard (IRGC) ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे सैन्य अभियान को कुछ हफ्तों में खत्म कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है। इस स्थिति से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और व्यापार पर भी बुरा असर पड़ने की संभावना है।
- ईरान के Qeshm द्वीप पर बने पानी साफ करने वाले प्लांट पर हमले से वह बंद हो गया है
- Aluminium Bahrain (Alba) ने अपने कुल उत्पादन में 19 प्रतिशत की कमी की है
- ब्रिटेन में जेट फ्यूल की आखिरी शिपमेंट इस हफ्ते पहुंचने की उम्मीद है, इसके बाद संकट बढ़ सकता है
- यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस संघर्ष में शामिल होकर तनाव बढ़ा दिया है
- 20 से अधिक देशों ने ईरान की कार्रवाई की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की अपील की है
