Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव की वजह से पूरी दुनिया में तेल के भंडार तेजी से कम हो रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खींचतान ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को बुरी तरह प्रभावित किया है। Goldman Sachs जैसी बड़ी कंपनियों ने चेतावनी दी है कि जिस रफ़्तार से तेल खत्म हो रहा है, वह आने वाले समय के लिए बहुत बड़ी चिंता की बात है।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या हुआ और क्यों बढ़ी टेंशन?

9 मई 2026 को आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक कमजोर युद्धविराम (ceasefire) लागू है, लेकिन सैन्य कार्रवाई की वजह से यह खतरे में है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने उनके दो तेल टैंकरों पर हमला किया। वहीं US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि उन्होंने 58 कमर्शियल जहाजों को ईरानी बंदरगाहों की तरफ जाने से रोका। अमेरिका ने M/T Hasna नाम के एक ईरानी टैंकर के रडर पर हमला कर उसे बेकार कर दिया। राष्ट्रपति Donald Trump ने इन हमलों को मामूली बताया लेकिन चेतावनी दी कि अगर ईरान ने शांति समझौता नहीं माना तो सख्त कार्रवाई होगी।

तेल के भंडार में कितनी कमी आई और क्या है ताज़ा डेटा?

मार्केट एक्सपर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने तेल के घटते स्टॉक को लेकर गंभीर आंकड़े जारी किए हैं। तेल की सप्लाई चेन टूटने से ग्लोबल मार्केट में अफरा-तफरी का माहौल है। नीचे दी गई टेबल में मौजूदा स्थिति का ब्यौरा है:

संस्था / विवरण डेटा और प्रभाव
Goldman Sachs (कुल स्टॉक) 101 दिन की डिमांड से घटकर मई के अंत तक 98 दिन होने का अनुमान
IEA (मार्च 2026) कुल तेल भंडार में 85 मिलियन बैरल की गिरावट
Morgan Stanley 1 मार्च से 25 अप्रैल के बीच रोजाना 4.8 मिलियन बैरल की कमी
अप्रैल प्रोडक्शन लॉस मिडल ईस्ट में करीब 14.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) का नुकसान
इन्वेंट्री ड्रॉ (अप्रैल) 11-12 मिलियन बैरल प्रति दिन की रिकॉर्ड गिरावट
Kpler का अनुमान जहाजों की आवाजाही पहले के मुकाबले केवल 40-50% तक ही रह पाएगी
PGSA (ईरान शुल्क) गुजरने वाले हर जहाज से 2 मिलियन डॉलर तक की फीस वसूली जा रही है

खलीजी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?

इस संकट का सीधा असर Gulf देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। Saudi Arabia ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और Bahrain की राष्ट्रीय सुरक्षा के उपायों का समर्थन किया है। सऊदी सरकार ने मांग की है कि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के होनी चाहिए। ईरान ने अपनी नई अथॉरिटी PGSA के जरिए जहाजों की एंट्री पर कंट्रोल कर लिया है, जबकि US Treasury ने अपनी कंपनियों को ईरान को कोई भुगतान न करने का आदेश दिया है। तेल की कमी और बढ़ती कीमतों का असर सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट और महंगाई पर पड़ेगा, जिससे Gulf में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Strait of Hormuz संकट का दुनिया के तेल भंडार पर क्या असर पड़ा है?

इस संकट की वजह से ग्लोबल ऑयल स्टॉक 101 दिन की डिमांड से गिरकर 98 दिन पर आ गया है। IEA के अनुसार मार्च 2026 में ही 85 मिलियन बैरल तेल कम हुआ है।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की मुख्य वजह क्या है?

ईरान ने अमेरिकी सेना पर अपने टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है, जबकि अमेरिका ने ईरानी जहाजों को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई की है और ब्लॉकड लागू किया है।