हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहे भारी तनाव की वजह से 1,600 से ज़्यादा व्यावसायिक जहाज़ समुद्र में फंस गए हैं। इस वजह से दुनिया भर के व्यापार और समुद्री यातायात पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इस संकट की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच शुरू हुए हवाई युद्ध के बाद हुई थी। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और समुद्री नाविकों के लिए यह स्थिति एक कठिन परीक्षा की तरह बन गई है।

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आखिर क्यों फंसे हैं समुद्र में इतने सारे जहाज़?

टाइम्स कुवैत की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 1,600 से ज़्यादा जहाज़ अभी भी समुद्र में अटके हुए हैं। ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कड़ा नियंत्रण स्थापित कर लिया है। ईरान के अधिकारियों ने लारक द्वीप (Larak Island) के पास के एक खास रास्ते को ही एकमात्र सुरक्षित मार्ग घोषित किया है। इस नियम का पालन न करने वाले जहाज़ों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इतना ही नहीं, ईरान द्वारा जहाज़ों के निकलने के लिए लगभग 20 लाख डॉलर तक की फीस लेने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसे तेहरान टोल बूथ कहा जा रहा है।

अमेरिकी सेना की नाकेबंदी और कुवैत पर हुआ हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 17 अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह से नाकेबंदी कर रखी है। अमेरिकी सेना ने नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे छह जहाज़ों को रोका है। 30 मई 2026 को गांबिया के झंडे वाले मालवाहक जहाज़ लियान स्टार ने जब अमेरिकी चेतावनियों को अनसुना कर दिया, तो अमेरिकी सेना ने उसके इंजन रूम पर मिसाइल दाग दी। इसके अलावा, अब तक 116 अन्य जहाज़ों का रास्ता बदला जा चुका है। इसी बीच 3 जून 2026 को कुवैत हवाई अड्डे के टर्मिनल पर भी ड्रोन से हमला किया गया, जिससे हवाई अड्डे को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।

विभिन्न देशों के अधिकारियों के बड़े बयान

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने 7 मई 2026 को कहा था कि बीजिंग इस तनाव को कम करना चाहता है और वह अपने जहाज़ों तथा चालक दल की रक्षा के लिए कदम उठाएगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने 8 अप्रैल 2026 को संकेत दिया था कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो वे जवाबी कार्रवाई रोक देंगे और जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता देंगे। कतर के उप प्रधानमंत्री शेख सऊद बिन अब्दुर्रहमान अल थानी ने सामान्य पारगमन शुल्क का विरोध किया है, लेकिन बारूदी सुरंगों को हटाने जैसे विशेष कामों के लिए शुल्क पर बातचीत की इच्छा जताई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट कब और कैसे शुरू हुआ?

यह संकट 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान के खिलाफ हवाई युद्ध शुरू किया था, जिसके बाद से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर यातायात बाधित हो गया है।

क्या प्रवासियों की यात्रा पर भी इसका असर पड़ा है?

हां, 3 जून 2026 को कुवैत हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन हमले और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के कारण खाड़ी देशों में हवाई उड़ानों और व्यापारिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com