हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहा संकट अब पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बन सकता है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबा खिंचा तो दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों की भारी कमी हो सकती है. इसका सीधा असर खाद और ऊर्जा के निर्यात पर पड़ेगा जिससे अनाज की पैदावार घटेगी और कीमतें बढ़ेंगी. भारत और अफ्रीका जैसे गरीब देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है.

दुनिया में खाने-पीने का संकट क्यों आ सकता है?

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने बताया कि गरीब देशों पर इस संकट का सबसे बुरा असर होगा. खेती के लिए जरूरी खाद और ऊर्जा समय पर नहीं मिल पाएगी जिससे फसलों की पैदावार कम हो जाएगी. दुनिया की करीब एक-तिहाई खाद इसी रास्ते से जाती है. अगर जहाजों की आवाजाही रुकी रही तो महंगाई बढ़ेगी और ग्लोबल ग्रोथ धीमी हो जाएगी. मार्च के अंत तक यहाँ से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या 90 प्रतिशत तक गिर गई थी.

अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) करने का ऐलान किया. अमेरिकी मिलिट्री ने इसे सोमवार दोपहर 14:00 GMT से लागू करने का फैसला किया है. ईरान की सेना ने अमेरिका के इस कदम को समुद्री डकैती (piracy) करार दिया है. वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने साफ कर दिया कि उनका देश इस नाकाबंदी का समर्थन नहीं करेगा और वह अमेरिका-इजराइल के ईरान युद्ध में शामिल नहीं होगा.

आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

इस संकट की वजह से तेल और खाद की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने इसे तेल बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा व्यवधान बताया है. खाद की कमी से आने वाले समय में अनाज महंगा होगा, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा.

विवरण प्रभाव/स्थिति
यूरिया की कीमत 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी (करीब 700 डॉलर प्रति मीट्रिक टन)
टैंकर ट्रैफिक 90 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई
खाद आपूर्ति दुनिया की 1/3 सप्लाई इसी रास्ते से होती है
चीन का फैसला मई से सल्फरिक एसिड का निर्यात बंद करेगा
प्रभावित क्षेत्र भारत, ब्राजील, चीन और अफ्रीकी देश
जलडमरूमध्य की स्थिति जहाजों के लिए खतरनाक, आवाजाही लगभग बंद